Vastu Niyam: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र होता है. घर का हर हिस्सा चाहे वह मुख्य द्वार हो, रसोई, शयनकक्ष या फिर खिड़कियां ही क्यों ना हो, यह सभी सीधे तौर पर व्यक्ति के जीवन पर असर डालती हैं. वास्तु के मुताबिक इन संरचनाओं की सही या गलत स्थिति सकारात्मकता और नकारात्मकता दोनों को जन्म दे सकती है. खिड़कियों को वास्तु में विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि यहीं से घर के भीतर सूरज की रोशनी, ताजी हवा और ऊर्जा का प्रवेश होता है. सही रौशनी और वेंटिलेशन न केवल सेहत के लिए जरूरी है, बल्कि मानसिक संतुलन और घर के माहौल पर भी असर डालती हैं. इसी कारण वास्तु शास्त्र में खिड़कियों की संख्या, आकार और दिशा को लेकर खास नियम बताए गए हैं.
वास्तु के जानकारों के मुताबिक अगर खिड़कियां सही दिशा और सही संख्या में हों, तो घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. वहीं, इन नियमों की अनदेखी करने पर घर में तनाव, आर्थिक परेशानियां और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां पैदा हो सकती हैं. यही वजह है कि घर बनवाते समय या रिनोवेशन के दौरान खिड़कियों की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है.
इतनी खिड़कियां शुभ
वास्तु के अनुसार घर में खिड़कियों की संख्या हमेशा सम (Even Number) में होनी चाहिए. जैसे 2, 4, 6 या 8 खिड़कियां शुभ मानी जाती हैं. इसके विपरीत, 3, 5, 7 या 9 जैसी विषम संख्या में बनी खिड़कियां घर की ऊर्जा को असंतुलित कर सकती हैं. मान्यता है कि सम संख्या में खिड़कियां होने से घर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है, जिससे मानसिक शांति, पारिवारिक सौहार्द और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है. यही कारण है कि वास्तु विशेषज्ञ घर बनवाते समय इस पहलू पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं.
खिड़कियों की सही दिशा का महत्व
सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि खिड़कियों की दिशा भी उतनी ही अहम होती है. वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर और पूर्व दिशा में बनी खिड़कियां बेहद शुभ मानी जाती हैं. इन दिशाओं से आने वाली सूर्य की किरणें और ताजी हवा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं. पूर्व दिशा से उगता हुआ सूर्य स्वास्थ्य, उत्साह और नई शुरुआत का प्रतीक है, जबकि उत्तर दिशा को धन और अवसरों की दिशा माना जाता है. इन दिशाओं में खिड़कियां होने से घर में खुशहाली और प्रगति के योग बढ़ते हैं.
किन दिशाओं से बचना चाहिए
वास्तु के अनुसार दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में अधिक या बड़ी खिड़कियां बनवाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे घर की स्थिर ऊर्जा प्रभावित हो सकती है. ऐसी स्थिति में आर्थिक अस्थिरता, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं.