scorecardresearch
 

उम्र 2 साल, संस्कृति के 30+ मंत्र याद! फोन से दूर रहने वाली ये सुपर टैलेंटेड बच्ची कौन है?

सिर्फ 24 महीने की उम्र में प्रिशा को 30 से ज्यादा संस्कृत मंत्र और श्लोक याद हैं. वह न सिर्फ उन्हें साफ उच्चारण के साथ बोलती है, बल्कि कई श्लोकों का अर्थ समझने की कोशिश भी करती है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि प्रिशा खुद फोन से दूरी बनाकर रखती है.

Advertisement
X
सिर्फ 24 महीने की उम्र में प्रिशा को 30 से ज्यादा संस्कृत मंत्र और श्लोक याद हैं. (Photo: ITG)
सिर्फ 24 महीने की उम्र में प्रिशा को 30 से ज्यादा संस्कृत मंत्र और श्लोक याद हैं. (Photo: ITG)

आज के दौर में जहां छोटे-छोटे बच्चे मोबाइल स्क्रीन में खोते जा रहे हैं. वहीं जयपुर की महज दो साल की एक नन्ही परी ने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया को चौंका दिया है. जिस उम्र में बच्चे ठीक से बोलना भी शुरू नहीं कर पाते हैं, उस उम्र में जयपुर की प्रिशा शर्मा ने अपनी अद्भुत याददाश्त, संस्कारों और प्रतिभा से ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज करवाया है. प्रिशा को हाल ही में ‘सुपर टैलेंटेड किड’ के खिताब से सम्मानित किया गया और इसकी वजह जानकर हर कोई दंग रह जाता है.

सिर्फ 24 महीने की उम्र में प्रिशा को 30 से ज्यादा संस्कृत मंत्र और श्लोक याद हैं. वह न सिर्फ उन्हें साफ उच्चारण के साथ बोलती है, बल्कि कई श्लोकों का अर्थ समझने की कोशिश भी करती है. इसके अलावा वह 80 से ज्यादा बॉडी पार्ट्स पहचान सकती है. सूर्य नमस्कार कर सकती है. हाथों के बल चल लेती है और अपने कद से तीन गुना ऊंची ग्रिल पर चढ़ भी जाती है. इतना ही नहीं, प्रिशा सभी देवी-देवताओं को पहचानती है और उनके बारे में काफी कुछ जानती है. इतनी कम उम्र में इतनी सारी चीजें सीख लेना यह साबित करता है कि यह बच्ची सच में असाधारण है.

फोन से दूर रहती है प्रिशा
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जहां आज बच्चों को खाना खिलाने के लिए मोबाइल देना मजबूरी बन चुका है, वहीं प्रिशा खुद फोन से दूरी बनाकर रखती है. जब उससे पूछा जाता है कि वह मोबाइल क्यों नहीं चलाती तो उसका मासूम जवाब होता है- “फोन देखने से आंखें खराब हो जाती हैं.” उसकी मां बताती हैं कि प्रिशा सिर्फ खुद ही फोन से दूर नहीं रहती, बल्कि अपने माता-पिता को भी ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल नहीं करने देती.

Advertisement

परिजनों ने बताया कि प्रिशा का पहला शब्द भी कोई सामान्य शब्द नहीं था. उसने सबसे पहले “ॐ” बोलना सीखा था. दरअसल, उसके घर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय है. घर की सुबह भजन और मंत्रों के साथ होती है और यही माहौल धीरे-धीरे प्रिशा के व्यक्तित्व का हिस्सा बन गया. उसके माता-पिता बताते हैं कि उन्होंने कभी उस पर दबाव डालकर कुछ नहीं सिखाया. प्रिशा ने अपनी जिज्ञासा और सीखने की चाह से यह सब खुद सीखा है.

जहां दूसरे बच्चों के खिलौनों में कार और डॉल्स होती हैं, वहीं प्रिशा के पास बाल गणेश, हनुमान जी और धार्मिक कहानियों की किताबें हैं. उसके दादा-दादी उसे राजा-रानी की कहानियों की जगह भगवानों की कथाएं सुनाते हैं, जिन्हें वह बड़े ध्यान से सुनती है. यही संस्कार और परिवार का सकारात्मक माहौल आज उसे इतनी छोटी उम्र में एक अलग पहचान दिला रहे हैं.

पैरेंट्स के लिए बड़ा संदेश
प्रिशा की कहानी सिर्फ एक बच्ची की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन माता-पिता के लिए भी एक संदेश है जो मान चुके हैं कि बिना मोबाइल बच्चों का पालन-पोषण संभव नहीं. यह नन्ही बच्ची साबित कर रही है कि सही माहौल, अच्छे संस्कार और परिवार का साथ बच्चों को स्क्रीन नहीं, बल्कि संस्कारों और ज्ञान की दुनिया से जोड़ सकता है. जयपुर की यह छोटी सी बेटी आज हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement