11 मार्च को शीतला अष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा. यह पर्व हर साल चैत्र कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. कई जगहों पर इसे बसोड़ा या बसोड़ा अष्टमी भी कहा जाता है. इस दिन मां शीतला को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है. फिर इस भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण भी किया जाता है. कहते हैं कि इस दिन देवी की विधिवत उपासना करने से संतान को आरोग्य का वरदान मिलता है. ज्योतिषविदों का कहना है कि यदि इस पावन तिथि पर मां शीतला के कुछ दिव्य मंत्रों का जाप किया जाए तो जीवन की हर बाधा को दूर किया जा सकता है.
1. ऊं शीतलां शान्ति रूपिणीं तुष्टां सर्व सुख प्रदाम्। शरण्यां सर्व पापघ्नीं नित्या पूज्यां दयामयीं।।
मां शीतला को सर्वसुख और शांति देने वाली देवी माना जाता है. उनके इस मंत्र का जाप करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. व्यक्ति के जीवन में कभी चिंता-तनाव नहीं रहता है.
2. ऊं शीतलायै नमः
मां शीतला के इस मंत्र के जाप से आरोग्य का वरदान मिलता है. यदि आप अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए इस मंत्र का जाप करें तो निश्चित तौर पर आपको इसका लाभ मिलेगा.
3. ऊं श्रीं शीतलायै नमः
देवी के इस मंत्र का जाप करने से संतान के जीवन में चल रही समस्याओं का नाश किया जा सकता है. संतान की उन्नति और उसकी सफलता के लिए भी इस मंत्र का जाप बेहद कारगर माना जाता है.
4. ऊं अष्टदल पत्रयुक्ता शीतला पतये नमः
इस मंत्र में शीतला माता की पूजा अष्टदल कमल के पत्तों के माध्यम से की जाती है. मान्यता है कि पूरी श्रद्धा और नियम से इस मंत्र का जाप करने पर व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं.
5. ऊं शीतलां शान्तिदात्रीं शरणं भगवतीं हुम्.
इस मंत्र का जाप खासतौर से रोगों से मुक्ति के लिए किया जाता है. शीतला माता को रोगों को दूर करने वाली देवी माना जाता है और उनके इस मंत्र का जाप करने से शारीरिक कष्टों से राहत मिलने की मान्यता है.