आज रथ सप्तमी है. हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी या आरोग्य सप्तमी मनाई जाती है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान सूर्य का प्राकट्य हुआ था, जो कश्यप ऋषि और माता अदिति के संयोग से संभव हुआ. इसी कारण इस तिथि को सूर्य की जन्मतिथि भी कहा जाता है. इस दिन विधि-विधान से सूर्य देव की पूजा की जाती है. मान्यता है कि रथ सप्तमी पर व्रत करने से उत्तम स्वास्थ्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है. इसलिए इसे आरोग्य सप्तमी और पुत्र सप्तमी भी कहा जाता है. कहते हैं कि इसी दिन से सूर्य देव के सात घोड़े उनके रथ का वहन करना शुरू करते हैं. इसलिए इसे रथ सप्तमी कहा जाता है.
रथ सप्तमी के शुभ मुहूर्त
इस साल रथ सप्तमी पर स्नान का शुभ मुहूर्त प्रातः 05.32 बजे से सुबह 07.12 बजे तक रहने वाला है. जबकि पूजा-पाठ और दान के लिए सुबह 11.12 बजे से दोपहर 12.33 बजे तक का मुहूर्त उत्तम रहने वाला है.
सूर्य उपासना का महत्व
सूर्य देव की पूजा व्यक्ति को यश, तेज और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती है. सूर्य उपासना से व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक विकास होता है. इससे ज्ञान, सुख, पद-प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि और सफलता की प्राप्ति भी की जा सकती है. यदि नौकरी या व्यापार में बाधाएं आ रही हों तो सूर्य की आराधना बहुत लाभकारी सिद्ध होती है. मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा से व्यक्ति को सरकारी या राजकीय सेवा प्राप्त होने के भी योग बनते हैं.
सूर्य को अर्घ्य देने की विधि
इस दिन सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी में स्नान करें. या फिर घर पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें. इसके बाद उगते सूर्य की दिशा में मुख करके खड़े हों. तांबे या पीतल के पात्र में जल लें और उसमें लाल चंदन, कुमकुम, लाल पुष्प, अक्षत और थोड़ा सा गुड़ मिलाएं. फिर जल को धीरे-धीरे सिर के ऊपर से प्रवाहित करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें. अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्रों का स्मरण करें. ध्यान रखें कि जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन हों. अर्घ्य देने के बाद सूर्य देव का ध्यान करें और आज्ञा चक्र व अनाहत चक्र पर तिलक लगाएं.
सूर्य उपासना के प्रभावशाली मंत्र
1. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते. अनुकंपये मां भक्त्यागृहणार्घ्यं दिवाकरः
2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्त्रकिरणाय. मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा
3. ॐ सूर्याय नमः
सूर्य के उपाय
इस दिन सूर्य भगवान को आक के फूल अर्पित करें. गुड़, गेहूं और तांबे के पात्रों का दान करें. इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें. यदि कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो प्रतिदिन प्रातः सूर्य को जल अर्पित करें. सुबह-शाम ॐ आदित्याय नमः मंत्र का जाप करते रहिए. रविवार को गुड़ और गेहूं का दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है.