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कौन था कालनेमि... शंकराचार्य विवाद के बीच सीएम योगी ने क्यों लिया ये नाम

प्रयागराज के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए कहा कि धर्म की आड़ में सनातन परंपरा को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है.

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने माघ मेला विवाद के बीच अपने बयान में कालनेमि का नाम लिया है
सीएम योगी आदित्यनाथ ने माघ मेला विवाद के बीच अपने बयान में कालनेमि का नाम लिया है

प्रयागराज माघमेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जुड़ा विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है. मामले में हो रही तमाम बयानबाजियों के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी गुरुवार को बड़ी बात कह दी. उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि 'ऐसे तमाम कालनेमि होंगे जो धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे. सीएम योगी ने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता.'

कौन था कालनेमि?

हालांकि उन्होंने किसी का नाम लिया लेकिन उनके बयान में धर्म, सनातन, परंपरा जैसे शब्द एक साथ आ गए जिससे इसका इशारा अभी हाल में हुए विवाद की ओर चला गया था. खैर, सीएम योगी ने जिस 'कालनेमि' का नाम लिया वह एक मायावी दैत्य था. इसका जिक्र रामायण और रामचरित मानस में बहुत विस्तार से मिलता है. रामकथा के अनुसार कालनेमि रावण का मित्र था और रावण के कहने पर वह हनुमानजी को छलने की कोशिश करता है और फिर मारा जाता है.

कालनेमि ने साधु का वेश धारण कर हनुमानजी को भ्रमित करने की कोशिश की थी. बाहर से वह धर्मात्मा और तपस्वी दिखाई देता था, लेकिन भीतर से उसका लक्ष्य श्रीराम के काम में बाधा डालना था, हालांकि हनुमानजी ने उसके छल को पहचान लिया था. 

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रामायण में मिलता है जिक्र

लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध में जब लक्ष्मणजी को मेघनाद की शक्ति लग जाती है, तब वह युद्ध भूमि में अचेत हो जाते हैं. लंका के सुषेण वैद्य उपाय बताते हैं कि उत्तर दिशा में द्रोणगिरी पर्वत पर संजीवनी बूटी होती है, जिसे सूर्यास्त से पहले लाकर उसका रस लक्ष्मण जी को पिलाया जाए तो वह फिर से जी उठेंगे. जब हनुमानजी संजीवनी बूटी लेने के लिए द्रोणगिरि पर्वत की ओर जा रहे थे, तब रावण ने कालनेमि को कहा कि वह किसी भी तरह हनुमान को उनके मार्ग से भटका दे या रोक दे.

तब कालनेमि ने तपस्वी का वेश धारण किया. उसने पर्वतीय रास्ते पर एक तालाब के किनारे सुंदर आश्रम बनाया, कुंड तैयार किया और खुद साधु के रूप में बैठ गया और रामभजन गाने लगा. हनुमानजी ने आकाश मार्ग से उसे देखा तो उतर कर नीचे आए और कालनेमि से प्रभावित हो गए. उसका उद्देश्य था हनुमानजी को भ्रमित करना, उन्हें तपस्या, स्नान और विश्राम के नाम पर रोकना ताकि वे समय पर संजीवनी न ला सकें. यही कारण है कि कालनेमि को 'छल, कपट और पाखंड का प्रतीक' माना जाता है.

हनुमानजी को छलने की कोशिश की थी

कालनेमि ने हनुमानजी से कहा कि आगे का रास्ता खतरनाक है, पहले स्नान करो, विश्राम करो और पुण्य अर्जित करो, लेकिन हनुमान को उसके शब्दों और व्यवहार में अंतर दिखाई दिया. हालांकि वह जब तालाब में स्नान करने गए तो एक मगरमच्छ ने उनकी पूंछ खींची. हनुमान जी ने मगरमच्छ को मार दिया तो उसमें से एक अप्सरा निकली जो शाप के कारण मगरमच्छ बन गई थी.  उसने ही हनुमानजी को कालनेमि का रहस्य बताया. जब कालनेमि का भेद खुला, तो हनुमानजी ने उसका अंत कर दिया और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ गए.

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यह प्रसंग केवल कथा नहीं है, बल्कि एक गहरा संदेश भी देता है कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को अक्सर धर्म, तप और परंपरा के नाम पर भ्रमित करने वाले मिलते हैं. भारतीय परंपरा में कालनेमि केवल एक दैत्य नहीं है, बल्कि वह एक प्रतीक है. वह उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो धर्म का आवरण ओढ़कर अधर्म करते हैं, जो साधु या संत का रूप धारण करके समाज को भ्रमित करते हैं.  कालनेमि रामायण का एक छोटा लेकिन प्रभावशाली पात्र है. सीएम योगी के बयान ने इसे फिर से प्रासंगिक बना दिया है.

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