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Premanand Maharaj: कौन सी तपस्या करें कि भगवान खुद वरदान देने आएं, हैरान कर देगा प्रेमानंद महाराज का जवाब

Premanand Maharaj:भगवान से प्रार्थना केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि हृदय की सच्ची पुकार है. जब मनुष्य अपने अहंकार, भय और अपेक्षाओं से ऊपर उठकर ईश्वर के सामने नतमस्तक होता है, तभी प्रार्थना सच्ची होती है.

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प्रेमानंद महाराज ने बताया प्रार्थना का असली मतलब
प्रेमानंद महाराज ने बताया प्रार्थना का असली मतलब

Premanand Mharaj: प्रेमानंद महाराज अपने सरल जीवन और गहन आध्यात्मिक अनुभवों के लिए जाने जाते हैं. आए दिन प्रेमानंद महाराज का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होता है. ऐसा ही एक वीडियो हाल में चर्चा का विषय बना हुआ है. जिसमें भक्त भक्ति और भगवान के प्रकट होने को लेकर सवाल पूछ रहा है. भक्त ने क्या प्रश्न किया और महाराज ने क्या उत्तर दिया जानते हैं.

दरअसल सत्संग के दौरान एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से प्रश्न किया कि “महाराज जी, मैं भगवान से मनचाहा वरदान प्राप्त करना चाहता हूं. ऐसी कौन-सी तपस्या करूं जिससे भगवान स्वयं प्रकट होकर मुझे वरदान दें?”

भक्त के इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भगवान ने स्वयं कहा है कि अर्थार्थी भी भक्त कहलाते हैं, पर यदि सच में भगवान को पाना है, तो जीवन में कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है. महाराज जी ने आगे कहा कि पहली बात, ब्रह्मचर्य में रहो और किसी भी अवस्था में उसका खंडन न होने दो. दूसरी बात, पवित्र और सात्त्विक आहार लो, वो भी अल्पाहार, जिससे केवल प्राणों का पोषण हो. तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात निरंतर नाम जप करो. राम नाम का अखंड स्मरण करो.  इससे जो चाहोगे, वह स्वतः प्राप्त होगा.”

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महाराज जी का जीवन-संदेश

प्रेमानंद महाराज ने आगे समझाया कि किसी की निंदा मत करो और न ही निंदा सुनो. यह साधना सरल नहीं है, लेकिन भगवान का साक्षात्कार भी कोई खेल नहीं है. तुम्हें मनुष्य शरीर मिला है. यह स्वयं में एक महान अवसर है. इस जीवन को व्यर्थ मत जाने दो, निरंतर राम नाम जपो.”

कितने दिन में प्रकट होंगे भगवान?

भक्त ने फिर पूछा कि महाराज जी, मैं ये सब कर लूंगा तो भगवान कितने दिनों में प्रकट होंगे?” इस पर प्रेमानंद महाराज बोले कि “जब तक भगवान प्रकट न हों, तब तक जप करते रहो. पहले पाप नष्ट होंगे, हृदय शुद्ध होगा. क्या पता कितने जन्मों के पाप संचित हों. जन्म-जन्मांतर तक मुनि उस परमात्मा को पाने के लिए यत्न करते हैं, तुम भी वही यत्न करो”. 

मृत्यु का भय और अंतिम सत्य

भक्त ने आगे पूछा कि “यदि साधना करते-करते मृत्यु हो गई तो?” महाराज ने उत्तर दिया कि “यदि चाह सच्ची है, तो भगवान अवश्य उसे पूर्ण करते हैं.” फिर महाराज जी ने पूछा कि आखिर तुम भगवान के प्रकट होने पर ऐसा क्या मांगोगे. आखिर तुम भगवान से क्या मांगना चाहते हो”. भक्त ने कहा कि “मैं चक्रवर्ती राजा बनना चाहता हूं.” यह सुनकर प्रेमानंद महाराज मुस्कुराए और बोले कि चक्रवर्ती राजा का अर्थ है जहां सूर्य का उदय होता है, वहां से जहां सूर्य अस्त होता है, वहां तक जिसका राज्य हो. कलियुग में ऐसा संभव नहीं. तुम केवल भगवान को पाने की इच्छा रखो. जब भगवान मिल जाते हैं, तो पूरा ब्रह्मांड तुम्हारा हो जाता है”.चक्रवर्ती तो बहुत छोटा है आप भगवान के दास्तव को क्यों नहीं मांगते हैं कि मैं हमेशा आपके चरणों के समीप रहूं. 

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