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जिन लोगों के हाथ में होती है ऐसी रेखा, उन्हें कभी नहीं होती पैसे की कमी

Money line in Palmistry: हर व्यक्ति को अपने भविष्य के बारे में चिंता होती है. हालांकि कर्म के बिना कुछ भी संभव नहीं हैं, लेकिन हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ की लकीरें देखकर बताया जा सकता है कि भाग्य अच्छा है या खराब.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • शुक्र से निकलने वाली भाग्य रेखा वाले लोग रहते हैं दूसरों पर आश्रित
  • कनिष्ठिका से मूल की तरफ जाने वाली इस रेखा से होता विशेष लाभ

हर व्यक्ति को अपने भविष्य के बारे में चिंता होती है. हालांकि कर्म के बिना कुछ भी संभव नहीं हैं, लेकिन हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ की लकीरें देखकर बताया जा सकता है कि भाग्य अच्छा है या खराब. हथेली में मौजूद भाग्य रेखा का अन्य सभी प्रकार की रेखाओं में विशेष स्थान होता है. अच्छी भाग्य रेखा होने से व्यक्ति को जीवन में धन-दौलत और मान-सम्मान प्राप्त होता है.  

ये होती है भाग्य रेखा 
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली से शुरू होते हुए वहां से सीधे मध्यमा अंगुली पर जाकर मिलने वाली रेखा को भाग्य रेखा कहते हैं. भाग्य रेखा जहां से शुरू होती है उसे मणिबंध कहते हैं और मध्यमा अंगुली के नीचे उभार वाले स्थान पर मिलती है उसे शनि पर्वत कहते हैं. आइये जानते हैं इस रेखा के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य. 

ऐसे लोगों के जीवन में नहीं रहती धन की कमी 
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि यदि ये रेखा बीच में टूटी हुई नहीं है, तो उत्तम फल देने वाली होती है. ऐसे व्यक्तियों को धन, ज्ञान, स्वास्थ्य, प्रतिभा और प्रेम की कमी नहीं रहती है. जिनके हाथ में ये रेखा होती ही नहीं है, वे निर्धन, दुखी और दरिद्र रहते हैं. मणिबंध से चलकर शनि के स्थान तक पहुंचने वाली भाग्य रेखा बुद्धिमता, समृद्धि और सुख-सौभाग्य का होना प्रकट करती है. 

ये लोग रहते हैं सदा सुखी 
भाग्य रेखा का अंतिम सिरा ऊपर की ओर झुका हुआ हो तो ऐसे व्यक्ति सदा सुखी रहेते हैं. किसी अवसर पर ऐसे लोगों को अपना मन मारकर नहीं बैठना पड़ता है. समय पड़ने पर आवश्यक वस्तुएं व मदद अनायास ही उसको प्राप्त हो जाएगी. वहीं जिनकी हथेली में भाग्य रेखा का अंतिम सिरा नीचे की ओर ​मुड़ गया हो, वह धनवान होते हुए भी परेशानियों में फंसे रहते हैं. आए दिन कोई न कोई झंझट उनके सामने खड़े रहते हैं. 

विदेशों में मिलती है ख्याति 
यदि भाग्य रेखा अनाम्बिका अंगुली की जड़ की ओर जा रही हो तो बहुत से लोगों के सहयोग से ऐसे लोगों को सुख प्राप्त हो सकता है. यदि ये रेखा कनिष्ठिका अंगुली से मूल की तरफ जा रही हो तो उसे विदेशों में भी बहुत ख्याति मिलती है और धनलाभ होता है. भाग्यरेखा शुक्र के स्थान से निकलती हो, तो दूसरे लोगों का भाग्य आश्रित रहता है, ऐसे लोगों को पैतृक या अचानक धन की प्राप्ति होती है, लेकिन उन्हें दूसरों के प्रभाव में रहना होता है. 

वृद्धावस्था में मिलती है उन्नति 
यदि भाग्य रेखा शनि के स्थान पर पहुंचकर बहृस्पति के स्थान की ओर मुड़ जाए, तो वृद्धावस्था में अधिक उन्नति होती है. यदि मूल में मष्तिस्क रेखा और भाग्य रेखा जुड़ी हुई हो तो समझना चाहिए कि बौद्धिक कार्यों से धन और सुख मिलेगा. यदि वह नीचे जाकर दो भागों में बंट गई हो, तो ऐसे व्यक्ति को घूमने का शौक होता है. 

 

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