Makar Sankranti 2026: इस साल मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा, संयोगवश इस दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है. मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का संयोग तकरीबन 23 वर्ष बाद बना है. इससे पहले यह दुर्लभ संयोग साल 2003 में बना था. एकादशी तिथि भगवान विष्णु की पूजा का विधान है और श्री हरि विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है. ज्योतिषविदों का कहना है कि एकादशी तिथि पर तुलसी से जुड़ी कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए. इससे मां लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं. आइए जानते हैं कि वो गलतियां क्या हैं.
तुलसी दल न तोड़ें
मकर संक्रांति के संयोग में आई षटतिला एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें. दरअसल, एकादशी तिथि पर तुलसी माता की विधिवत पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. कई लोग भगवान विष्णु की आराधना के लिए उसी दिन तुलसी दल तोड़ लेते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. यदि भगवान को तुलसी दल अर्पित करना चाहते हैं या भोग प्रसाद में इसका प्रयोग करना चाहते हैं तो एक दिन पहले ही पत्तियां तोड़कर रख लें. साथ ही, पत्ते तोड़ने से पूर्व तुलसी माता को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करना आवश्यक है.
एकादशी को जल न चढ़ाएं
एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल डालना वर्जित माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता स्वयं भगवान विष्णु के निमित्त निर्जला व्रत करती हैं. इसलिए उन्हें जल देने से उनका व्रत भंग हो सकता है. विशेष रूप से उत्पन्ना एकादशी पर तुलसी को जल अर्पित करने से पूजा का पुण्य फल कम हो जाता है. इसके अलावा, रविवार और ग्रहण काल में भी तुलसी पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए.
गंदे या जूठे हाथों से तुलसी न छुएं
एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को जूठे या अशुद्ध हाथों से स्पर्श करना वर्जित है. शास्त्रों में तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है. ऐसे में अशुद्ध हाथों से तुलसी स्पर्श करने से माता लक्ष्मी अप्रसन्न हो सकती हैं. इस दिन घर में मांस, मदिरा या अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन भी निषेध है. इस दिन घर में स्वच्छता और सात्विकता बनाए रखें. संध्या काल में तुलसी के पास दीपक अवश्य प्रज्वलित करें.