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Mahashivratri 2026: आखिर क्यों महादेव ही हैं 'आदर्श पति'? जानें 5 खूबियां

Mahashivratri 2026: भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह केवल दो देवों का मिलन नहीं, बल्कि प्रकृति और पुरुष का संतुलन है. शिव का संयम, उनका त्याग और उनका अटूट प्रेम ही वह कारण है कि सदियों से 'शिव सा वर' पाने की चाह हर कन्या के मन में जीवित है.

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महाशिवरात्रि 2026
महाशिवरात्रि 2026

Mahashivratri 2026: सनातन धर्म में भगवान शिव को 'आदिदेव' और 'जगद्गुरु' माना गया है, लेकिन एक भक्त के लिए वे 'भोलेनाथ' हैं और एक स्त्री के लिए 'आदर्श पति'. मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी. आज भी कुंवारी कन्याएं 'सोलह सोमवार' का कठिन व्रत इसी कामना के साथ रखती हैं कि उन्हें महादेव जैसा जीवनसाथी मिले. लेकिन यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि शिव के व्यक्तित्व में छिपे वो आध्यात्मिक गुण हैं जो एक पुरुष को 'उत्तम वर' की श्रेणी में खड़ा करते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं शिव की उन 5 खूबियों के बारे में, जो उन्हें हर युग में सर्वश्रेष्ठ पार्टनर बनाती हैं.

अर्धनारीश्वर रूप: स्त्री-पुरुष की समानता का सर्वोच्च दर्शन
धार्मिक ग्रंथों में शिव का 'अर्धनारीश्वर' रूप सबसे महत्वपूर्ण है. यह रूप दर्शाता है कि सृष्टि का संचालन शिव (पुरुष) और शक्ति (स्त्री) के बिना अधूरा है. शिव ने माता पार्वती को अपने शरीर का आधा हिस्सा देकर यह संदेश दिया कि पत्नी केवल 'दासी' या 'पीछे चलने वाली' नहीं, बल्कि 'बराबर की हिस्सेदार' है.

सती से पार्वती तक: जन्म-जन्मांतर का अटूट प्रेम
शिव का प्रेम भौतिक आकर्षण नहीं, बल्कि आत्मा का मिलन है. जब माता सती ने यज्ञ की अग्नि में आत्मदाह किया, तो वियोग में शिव ने तांडव किया और उनके पार्थिव शरीर को लेकर तीनों लोकों में भटके. इसके बाद जब सती ने पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया, तब भी शिव ने उन्हें उसी प्रेम से स्वीकार किया.


हलाहल विषपान: परिवार का सुरक्षा कवच
समुद्र मंथन के दौरान जब भयंकर 'हलाहल' विष निकला, जिससे सृष्टि का विनाश निश्चित था, तब महादेव ने उसे स्वयं पी लिया. उन्होंने विष को गले से नीचे नहीं उतरने दिया और 'नीलकंठ' कहलाए. एक गृहस्थ के रूप में शिव सिखाते हैं कि परिवार पर आने वाली हर बुराई, कड़वाहट और संकट को पति को अपने ऊपर झेल लेना चाहिए ताकि उसका परिवार सुरक्षित रहे. यह 'धैर्य' और 'सुरक्षा' का भाव ही उन्हें खास बनाता है.

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वैराग्य और गृहस्थी का अनूठा संतुलन
शिव एक तरफ महायोगी हैं जो श्मशान में ध्यान लगाते हैं, तो दूसरी तरफ वे माता पार्वती के साथ कैलाश पर एक आदर्श गृहस्थ की तरह रहते हैं. वे अपने बच्चों (कार्तिकेय और गणेश) को संस्कार देते हैं , वे नंदी व गणों के साथ परिवार की तरह रहते हैं.

बाहरी आडंबर से दूर, गुणों की पूजा
शिव के पास न महल है, न स्वर्ण आभूषण.  वे गले में सर्प और शरीर पर भस्म धारण करते हैं.  लेकिन उनकी आंतरिक शक्ति और करुणा इतनी है कि देवता हो या दानव, सब उनके आगे झुकते है.

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