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Magh Purnima 2026 Date: 1 या 2 फरवरी कब है माघ पूर्णिमा? नोट कर लें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

माघ पूर्णिमा पर माघ माह का अंतिम स्नान होता है. इस दिन स्नान, दान और जाप का विशेष महत्व बताया गया है. इस बार माघ पूर्णिमा की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति है. कोई 1 फरवरी तो कोई 2 फरवरी को माघ पूर्णिमा बता रहा है.

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माघी पूर्णिमा पर किया गया स्नान-दान शीघ्र फल देता है. (Photo: Pixabay)
माघी पूर्णिमा पर किया गया स्नान-दान शीघ्र फल देता है. (Photo: Pixabay)

Magh Purnima 2026 Date: माघ पूर्णिमा आने वाली है. इसे माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है. ये माघ स्नान का अंतिम दिन होता है. कहते हैं कि माघी पूर्णिमा पर किया गया स्नान-दान शीघ्र फल देता है. इस दिन दान, जाप और पुण्य कर्म का भी विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन श्रद्धा के साथ स्नान करने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. हालांकि इस बार माघ पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोग असमंजस में हैं. कोई 1 फरवरी तो कोई 2 फरवरी को माघ पूर्णिमा बता रहा है. आइए जानते हैं कि माघ पूर्णिमा किस दिन-तारीख को पड़ रही है.

माघ पूर्णिमा 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में माघ पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर आरंभ होगी और 2 फरवरी को तड़के 3 बजकर 38 मिनट पर इसका समापन होगा. ऐसे में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी दिन रविवार को मनाई जाएगी. दिन रविवार पड़ने से इस बार माघी स्नान का महत्व और बढ़ गया है. एक तो इस दिन सूर्य दिन की विशेष कृपा रहेगी. इस दिन पवित्र नदियों के घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच सकते हैं.

माघ पूर्णिमा की पूजा विधि
माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा का विधान है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और स्नान-दान करने से आदमी को पापों से मुक्ति मिलती है. माघी पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें और पितरों के लिए तर्पण जरूर करें. यदि नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है.

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स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और विधिपूर्वक पूजा की शुरुआत करें. सबसे पहले कलश की स्थापना कर भगवान गणेश की पूजा करें. इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करें. फिर चंद्र देव की पूजा करें. शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें. पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें. यदि संभव हो तो इस दिन घर में सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है.

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