Holi 2026 Date: पंचांग और गणनाओं के अनुसार, इस साल होली पिछले कई सालों में बहुत पहले दस्तक दे रही है. पिछले 6 सालों में पहली बार ऐसा हो रहा है कि होली 4 मार्च को मनाई जाएगी. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, अधिकमास और ज्येष्ठ मास के दो बार पड़ने के कारण इस बार कई पर्व-त्योहारों की तिथियों में बदलाव देखने को मिल रहा है. पिछले साल होली 15 मार्च को मनाई गई थी, लेकिन इस बार पंचांग के अनुसार तिथियों में फर्क दिखाई दे रहा है. फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा की शुरुआत 2 मार्च की शाम 5 बजकर 32 मिनट से होगी और 3 मार्च की शाम 4 बजकर 46 मिनट तक रहेगी. इसी पूर्णिमा तिथि के आधार पर होलिका दहन और होली का निर्णय लिया गया है.
इससे पहले कब कब मनी होली?
साल 2025: 15 मार्च
साल 2024: 25 मार्च
साल 2023: 08 मार्च
साल 2022: 18 मार्च
साल 2021: 29 मार्च
साल 2020: 10 मार्च
कब होगा होलिका दहन?
इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च, मंगलवार को किया जाएगा. पंचांग के अनुसार, 2 मार्च को होलिका दहन इसलिए नहीं किया जाएगा क्योंकि इस दिन पूर्णिमा लगते ही भद्रा भी शुरू हो जाएगी. शास्त्रों के अनुसार, भद्रा के मुख काल में होलिका दहन नहीं करना चाहिए, बल्कि उसके पूंछ काल में करना शुभ माना जाता है. इसी कारण 3 मार्च की शाम 6 बजकर 22 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 50 मिनट के बीच होलिका दहन का शुभ समय बताया गया है.
3 मार्च को क्यों नहीं खेली जाएगी होली?
3 मार्च को चंद्रग्रहण लग रहा है. यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का नजर आएगा, जिसे आम भाषा में ब्लड मून भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है. यानी 3 मार्च की सुबह करीब 9 बजकर 39 मिनट से सूतक लग जाएगा. सूतक काल में शुभ कार्य और उत्सव मनाना वर्जित माना जाता है. इसलिए 3 मार्च को रंग खेलने की परंपरा नहीं निभाई जाएगी.
4 मार्च को मनाई जाएगी होली
ग्रहण और सूतक को ध्यान में रखते हुए 4 मार्च को रंगों की होली खेलना शास्त्रों के अनुसार उचित रहेगा. इस दिन पूर्वा फाल्गुनी और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग रहेगा. सुबह 7 बजकर 27 बजे तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा, इसके बाद पूरे दिन उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा. साथ ही धृति योग भी बना रहेगा.