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Durga Ashtami 2026: दुर्गा अष्टमी पर कल क्या है कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त? नोट करें टाइमिंग

इस साल दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन के दो विशिष्ट मुहूर्त रहने वाले हैं. पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 51 मिनट तक रहेगा. इसके बाद, दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 32 मिनट पर होगा.

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अष्टमी या नवमी तिथि पर लोग छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजते हैं. (Photo: ITG)
अष्टमी या नवमी तिथि पर लोग छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजते हैं. (Photo: ITG)

Durga Ashtami 2026: चैत्र नवरात्र की महाष्टमी 26 मार्च दिन गुरुवार को है. इस दिन कन्या पूजन का विधान बताया गया है. कन्या पूजन के बगैर नवरात्र का महापर्व बिल्कुल अधूरा है. अष्टमी या नवमी तिथि पर लोग छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं. कन्या पूजन अष्टमी तिथि पर करना बहुत उत्तम और फलदायी माना जाता है. आइए जानते हैं कि इस साल नवरात्र की अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.

चैत्र नवरात्र 2026 महाअष्टमी तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शुरू होगी. और 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर इसका समापन होगा. उदया तिथि के आधार पर महाष्टमी 26 मार्च दिन गुरुवार को मनाई जाएगी.

महाअष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
इस साल दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन के तीन विशिष्ट मुहूर्त रहने वाले हैं. पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इसके बाद, मुहूर्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 01 मिनट पर होगा. आप दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट के बीच अभिजीत मुहूर्त में भी कन्या पूजन कर सकते हैं. आप सुविधानुसार इनमें से किसी भी मुहूर्त में कन्या पूजन कर सकते हैं.

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महाअष्टमी पर कन्या पूजन की विधि और नियम
नवरात्रि की अष्टमी तिथि से एक दिन पहले छोटी-छोटी कन्याओं को अपने घर आने के लिए आमंत्रित कर दें. इन कन्याओं की संख्या 9 होती है. इनके साथ एक बटुक यानी छोटा सा बालक भी बैठाया जाता है. जब ये कन्याएं घर आएं तो उन पर फूलों की वर्षा करें. देवी के जयकारे लगाएं. एक बड़े थाल में इनके चरण धुलाएं और किसी साफ-सुथरे स्थान पर सम्मानपूर्वक बैठाएं. इसके बाद इन कन्याओं के माथे पर रोली-कुमकुम का तिलक करें. उस पर अक्षत लगाएं. फिर इनकी थाली में भोजन रखें.

इन कन्याओं को आप हलवा-पूरी और चने का भोग अर्पित कर सकते हैं. भोजन कराने के बाद इन्हें सामर्थ्य के अनुसार कुछ कुछ दक्षिणा या उपहार जरूर दें. आप इन्हें कुछ पैसे, वस्त्र या इस्तेमाल होने वाला कोई सामान भी भेंट कर सकते हैं. इसके बाद इनके चरणों में मस्तक टिकाकर आशीर्वाद लें और अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें.

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