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इस बार क्यों खास हैं नवरात्र? व्रत रखने से पूरी होंगी मन की मुरादें

नवरात्रि में नौ दिन भी व्रत रख सकते हैं और दो दिन भी जो लोग नौ दिन व्रत रखेंगे वो लोग दशमी को पारायण करेंगे.

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इस बार यह नवरात्रि 29 सितम्बर से शुरू होगी और इसका समापन दशहरे के साथ 08 अक्टूबर को होगा.
इस बार यह नवरात्रि 29 सितम्बर से शुरू होगी और इसका समापन दशहरे के साथ 08 अक्टूबर को होगा.

यह आश्विन शुक्ल पक्ष की शारदीय नवरात्रि है. इसे शक्ति प्राप्त करने की नवरात्रि भी कहा जाता है. इस बार यह नवरात्रि 29 सितम्बर से शुरू होगी और इसका समापन दशहरे के साथ 08 अक्टूबर को होगा. इस बार की नवरात्रि पूरे नौ दिन की होगी इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी. परन्तु माता दुर्गा की विदाई घोड़े पर होगी.

नवरात्रि में व्रत का विधान क्या होगा?

- नवरात्रि में नौ दिन भी व्रत रख सकते हैं और दो दिन भी

- जो लोग नौ दिन व्रत रखेंगे वो लोग दशमी को पारायण करेंगे

- जो लोग प्रतिपदा और अष्टमी को व्रत रक्खेंगे वो लोग नवमी को पारायण करेंगे

- व्रत के दौरान जल और फल का सेवन करें

- ज्यादा तला भुना और गरिष्ठ आहार ग्रहण न करें

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नवरात्रि में विशेष कामनाओं के लिए कैसे पूजा करें?

अच्छी पत्नी प्राप्ति और शीघ्र विवाह के लिए

-दुर्गा सप्तशती की पुस्तक में से नित्य 'अर्गला- स्तोत्र' का एक पाठ करने से सुलक्षणा पत्नी की प्राप्ति संभव हो जाती है

धन प्राप्ति के लिए

- जिस भी घर में नवरात्रि को श्री सूक्त का पाठ प्रतिदिन होता है उस घर में कभी भी आर्थिक संकट नहीं आता है

- नवरात्रि में देवी को पान के पत्ते में रखकर गुलाब की पंखुडियां अर्पित करने से भी स्थाई धन का लाभ होता है

जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए

- दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और कपूर तथा लौंग से आरती करें

- नित्य पूजा में मां दुर्गा को शहद एवं इत्र अर्पित करें

- नवरात्रि में प्रातः राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से भी जीवन की बाधाएं दूर होती हैं

कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है?

- कलश की स्थापना आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है

- इस बार प्रतिपदा तिथि 29 सितम्बर को प्रातःकाल से रात्रि 08.14 तक है

- इसलिए कलश की स्थापना रात्रि 08.14 के पूर्व कर ली जाएगी

कलश की स्थापना कैसे करें?

- कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लेना चाहिए

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- एक लकड़ी का पटरा रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाना चाहिए

- इस कपड़े पर थोड़ा- थोड़ा चावल रखना चाहिए

- चावल रखते हुए सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करना चाहिए

- एक मिट्टी के पात्र में जौ बोना चाहिए

- इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करना चाहिए

- कलश पर रोली से स्वस्तिक या ऊं बनाना चाहिए

- कलश के मुख पर रक्षा सूत्र बांधना चाहिए

- कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखने चाहिए

- कलश के मुख को ढक्कन से ढंक देना चाहिए

- ढक्कन पर चावल भर देना चाहिए

- एक नारियल ले उस पर चुनरी लपेटकर रक्षा सूत्र से बांध देना चाहिए

- इस नारियल को कलश के ढक्कन पर रखते हुए सभी देवताओं का आवाहन करना चाहिए

- अंत में दीप जलाकर कलश की पूजा करनी चाहिए

- कलश पर फूल और मिठाइयां चढ़ाना चाहिए

- नवरात्र में देवी पूजा के लिए जो कलश स्थापित किया जाता है वह सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का ही होना चाहिए

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