Maha Shivratri 2026 Date: महाशिवरात्रि की तारीख को लेकर अक्सर लोगों के मन में भ्रम हो जाता है. कभी पंचांग के हिसाब से एक तारीख सामने आती है, तो कहीं दूसरे कैलेंडर में अलग दिन बताया जाता है. इस बार भी कुछ लोग कह रहे हैं कि महाशिवरात्रि 15 तारीख को मनाई जाए या 16 तारीख को और इसका निशीथ काल भी, जो सबसे उत्तम काल माना जाता है, किस समय रहेगा? इसी निशीथ काल में हम साधनाएं, मंत्र-जाप, स्तोत्र-पाठ, कवच और अभिषेक आदि करते हैं.
इसके अलावा, यदि हम चार प्रहर की बात करें तो चारों प्रहर का समय क्या रहेगा? भगवान शिव की अखंड पूजा चार प्रहर में की जाती है, जिसे कई लोग पंच प्रहर पूजा भी कहते हैं. मूल रूप से चार प्रहर होते हैं और फिर पाँचवां प्रहर प्रारंभ होता है. तो यह पूजा किस समय करनी है और महाशिवरात्रि के व्रत का पारण का समय क्या रहेगा? तो आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि 15 फरवरी या 16 फरवरी, किस डेट को मनाना सही होगा और इन सारे सवालों के जवाब-
15 फरवरी या 16 फरवरी, कब रखा जाएगा महाशिवरात्रि का व्रत (Maha Shivratri 2026 Date)
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि 15 तारीख को ही मनाई जाएगी. तिथि के अनुसार, महाशिवरात्रि की शुरुआत 15 तारीख को होगी और यह 16 तारीख को आधे दिन के बाद समाप्त होगी. दरअसल, महाशिवरात्रि की पूजा में रात्रिकाल के चार प्रहर और निशीथ काल का माना जाता है. इस पर्व में उदयातिथि का नियम लागू नहीं होता है.
ऐसे में अगर आप महाशिवरात्रि 16 फरवरी की रात को मनाएंगे, तो यह सही नहीं होगा, क्योंकि 16 फरवरी की शाम के बाद महाशिवरात्रि की तिथि समाप्त हो जाएगी. ऐसे में उस रात शिवरात्रि मनाने का कोई महत्व नहीं रह जाएगा. इसे सरल भाषा में समझें तो 15 फरवरी की जो रात होगी, वही महाशिवरात्रि की रात मानी जाएगी. भले ही 16 फरवरी को उदयातिथि चतुर्दशी रहे, लेकिन महाशिवरात्रि का मुख्य पर्व 15 फरवरी की रात में ही मनाया जाएगा.
महाशिवरात्रि 2026 का पारण कब किया जाएगा? (Maha Shivratri 2026 Paran Timings)
चूंकि, 15 फरवरी की रात महाशिवरात्रि की होगी, इसलिए पारण 16 फरवरी को किया जाएगा. 16 फरवरी को सुबह 6 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक पारण का समय रहेगा. आप इस अवधि के बीच कभी भी महाशिवरात्रि के व्रत का पारण कर सकते हैं.
महाशिवरात्रि 2026 निशीथ काल का समय
महाशिवरात्रि पर निशीथ काल 15 फरवरी की रात में, अर्थात 16 फरवरी की तिथि की शुरुआत में पड़ेगा. यानी इसका समय 16 फरवरी को रात 12 बजकर 09 मिनट से लेकर अर्धरात्रि 1 बजकर 01 मिनट तक रहेगा. यह अवधि पूजा, जप, अभिषेक और साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ और शुभ मानी जाती है.
महाशिवरात्रि 2026 चार प्रहर पूजन का समय (Maha Shivratri 2026 Prahar Pujan Timings)
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, महाशिवरात्रि की रात यदि कोई जागकर प्रहर के अनुसार पूजा करना चाहता है, तो प्रहर का समय इस प्रकार रहेगा.
- प्रथम प्रहर 15 फरवरी को शाम 6 बजकर 37 मिनट से शुरू होगा.
- दूसरा प्रहर 15 फरवरी की रात 9 बजकर 45 मिनट से आरंभ होगा.
- तीसरा प्रहर 15 फरवरी की मध्यरात्रि के बाद 12 बजकर 53 मिनट से शुरू होगा.
- चौथा प्रहर 15 फरवरी की रात के बाद, 16 फरवरी की सुबह 4 बजे से प्रारंभ होगा यानी इसका समय सुबह 3 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा.
इन समयों के अनुसार आप प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग पूजा, जप और अभिषेक कर सकते हैं. इसके बाद, अगले दिन निर्धारित समय में पारण किया जाता है.
महाशिवरात्रि 2026 तिथि (Maha Shivratri 2026 Tithi)
द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि इस बार 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा.
महाशिवरात्रि 2026 पूजन विधि (Maha Shivratri 2026 Pujan Vidhi)
महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर या नजदीकी शिवालय में शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल चढ़ाएं. फिर दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं. अंत में दोबारा जल अर्पित करें. पूजा में बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल आदि चढ़ाएं और ''ऊं नमः शिवाय'' या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें.
यदि संभव हो तो रात में चार प्रहर के अनुसार शिवलिंग का अभिषेक करें और दीप जलाकर आरती करें. भगवान शिव को फल या सात्विक प्रसाद अर्पित करें. अगले दिन तय समय पर व्रत का पारण करें, पहले भगवान को भोग लगाएं और फिर स्वयं फलाहार या साधारण सात्विक भोजन ग्रहण करें.