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Guru Gobind Singh Birthday 2021: कब है गुरु गोबिंद सिंह जयंती? सिखों की सबसे बड़ी विरासत उनकी ये 5 चीजें

गुरु गोबिंद सिंह ने ही गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का गुरु घोषित किया था. सिख धर्म की मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा और सच्चाई की राह के लिए समर्पित कर दिया था.

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Guru Gobind Singh Birthday 2021: कब है गुरु गोबिंद सिंह जंयती? सिखों के लिए विरासत उनकी ये 5 चीजें
Guru Gobind Singh Birthday 2021: कब है गुरु गोबिंद सिंह जंयती? सिखों के लिए विरासत उनकी ये 5 चीजें
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का गुरु घोषित किया था
  • 20 जनवरी को गुरु गोबिंद सिंह जी की 354वीं जयंती मनाई जाएगी

Guru Gobind Singh Birthday 2021: सिखों के 10वें धर्म गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म पटना साहिब में हुआ था. साल 1699 में गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. यह सिखों के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है. गुरु गोबिंद सिंह ने ही गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का गुरु घोषित किया था. सिख धर्म की मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा और सच्चाई की राह के लिए समर्पित कर दिया था. गुरु गोबिंद सिंह के विचार और शिक्षाएं आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है.

कैसे मनाई जाती है गुरु गोबिंद सिंह जयंती- इसे प्रकाश पर्व या गुरु पर्व भी कहा जाता है. बुधवार, 20 जनवरी को गुरु गोबिंद सिंह जी की 354वीं जयंती मनाई जाएगी. देश-दुनिया में इस दिन सिख समुदाय के लोग प्रभात फेरी निकालते हैं. गुरुद्वारों में शबद कीर्तन का आयोजन किया जाता है और गुरबानी का पाठ किया जाता है.

सिख धर्म के लोग गुरु गोबिंद सिंह जयंती को बहुत धूम-धाम से मनाते हैं. गुरुद्वारों को सजाया जाता है. इस दिन खालसा पंत की झांकियां भी निकाली जाती हैं. प्रकाश पर्व पर लंगर का भी आयोजन किया जाता है. सिखों के लिए 5 चीजें- बाल, कड़ा, कच्छा, कृपाण और कंघा धारण करने का आदेश गुरु गोबिंद सिंह ने ही दिया था.

इन चीजों को 'पांच ककार' कहा जाता है, जिन्हें धारण करना सभी सिखों के लिए अनिवार्य होता है. गुरु गोबिंद सिंह को ज्ञान, सैन्य क्षमता आदि के लिए जाना जाता है. गुरु गोबिंद सिंह ने संस्कृत, फारसी, पंजाबी और अरबी भाषाएं भी सीखीं थी. वह धनुष-बाण, तलवार, भाला चलाने की कला में भी माहिर थे.

गुरु गोबिंद सिंह एक लेखक भी थे, उन्होंने स्वयं कई ग्रंथों की रचना की थी. उन्हें विद्वानों का संरक्षक माना जाता था. कहा जाता है कि उनके दरबार में हमेशा 52 कवियों और लेखकों की उपस्थिति रहती थी. इस लिए उन्हें 'संत सिपाही' भी कहा जाता था.  

 

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