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'राजनीति में महिलाओं को करनी पड़ती है पुरुषों से तीन गुना अधिक मेहनत', पूर्व CM वसुंधरा राजे का छलका दर्द

जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान वसुंधरा राजे ने कहा कि राजनीति में जगह बनाने के लिए महिलाओं को पुरुषों से तीन गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है. उन्होंने शिक्षा को महिलाओं की सफलता की कुंजी बताया. राजे ने कहा कि महिला साक्षरता और राजनीतिक भागीदारी में सुधार हुआ है, लेकिन प्रतिनिधित्व अब भी पर्याप्त नहीं है और इसे पुरुषों के बराबर होना चाहिए.

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शिक्षा ही महिलाओं की असली ताकत: वसुंधरा राजे (File Photo: ITG)
शिक्षा ही महिलाओं की असली ताकत: वसुंधरा राजे (File Photo: ITG)

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का राजनीति को लेकर दर्द छलका है. उन्होंने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए महिलाओं को पुरुषों की तुलना में तीन गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है. जयपुर में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजे ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा ही महिलाओं की सफलता की सबसे मजबूत कुंजी है.

राजनीति में महिलाओं को करनी पड़ती है तीन गुना मेहनत: वसुंधरा राजे

रिपोर्ट के मुताबिक 'जाट महिला शक्ति संगम' कार्यक्रम में बोलते हुए वसुंधरा राजे ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को आज भी कई स्तरों पर संघर्ष करना पड़ता है. उन्होंने कहा, 'महिलाओं को अपनी पहचान बनाने के लिए पुरुषों से कहीं अधिक मेहनत और संघर्ष करना पड़ता है, जब तक महिलाएं शिक्षित और आत्मनिर्भर नहीं होंगी, तब तक समानता का सपना अधूरा रहेगा.'

राजे ने आजादी के बाद महिलाओं की स्थिति में हुए बदलावों की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में महिला साक्षरता दर आजादी के समय महज 9 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर लगभग 65 प्रतिशत हो गई है. उन्होंने इसे सकारात्मक बदलाव बताया, लेकिन साथ ही कहा कि यह अभी भी पर्याप्त नहीं है और इसमें और सुधार की जरूरत है.

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संसद में महिला प्रतिनिधित्व अब भी कम : राजे

राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर आंकड़े रखते हुए उन्होंने कहा कि 1957 में आम चुनावों में महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी केवल तीन प्रतिशत थी, जबकि आज यह बढ़कर करीब 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है. उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में महिला प्रतिनिधित्व का उदाहरण देते हुए कहा कि पहली लोकसभा में केवल 22 महिला सांसद थीं, जबकि वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 74 हो चुकी है. इसी तरह, 1952 में राज्यसभा में महिला सदस्यों की संख्या 15 थी, जो अब बढ़कर 42 हो गई है.

हालांकि, राजे ने साफ शब्दों में कहा कि यह प्रगति पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा, 'यह संख्या अभी भी कम है. महिलाओं का प्रतिनिधित्व पुरुषों के बराबर होना चाहिए. लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब आधी आबादी की भागीदारी भी आधी सत्ता में दिखाई दे.'

 

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