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यूनिवर्सिटी कैंपस में गिलहरी की दहशत, एक महीने में 18 लोगों को काटा, पढ़ाई ठप!

उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में एक गिलहरी ने एक महीने में 18 से अधिक लोगों को काट लिया, जिससे कैंपस में दहशत फैल गई है. वहीं, पशुपालन विभाग की ओर से एहतियात के तौर पर घायलों को टिटनेस के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं.

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रेस्क्यू टीम भी फेल.(Photo: AI-generated)
रेस्क्यू टीम भी फेल.(Photo: AI-generated)

राजस्थान के उदयपुर में स्थित मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के आर्ट्स कॉलेज परिसर में इन दिनों एक गिलहरी दहशत का कारण बनी हुई है. बीते लगभग एक महीने में यह गिलहरी 18 से अधिक लोगों को काट चुकी है, जिससे विश्वविद्यालय परिसर में डर का माहौल बन गया है. खासतौर पर मनोविज्ञान और वुमेन स्टडीज विभाग के आसपास जाने वाले छात्र और कर्मचारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक, 22 अप्रैल को इस गिलहरी ने अचानक दो स्कॉलर्स पर हमला कर दिया था. इसके बाद से परिसर में आने-जाने वाले लोगों में भय और सतर्कता दोनों बढ़ गए हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि अब छात्र सामान्य गिलहरियों को देखकर भी डरने लगे हैं.

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कॉलेज प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह मामला सिर्फ डर का नहीं बल्कि शोध का विषय भी बन गया है. परिसर में इस असामान्य व्यवहार ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है और इसे समझने के प्रयास जारी हैं.

रेस्क्यू की कोशिशें और चुनौती

आर्ट्स कॉलेज के एसोसिएट डीन नवीन नंदवाना ने बताया कि एनिमल एड की टीम ने गिलहरी को सुरक्षित रेस्क्यू करने की कोशिश की थी, लेकिन वह पकड़ में नहीं आ सकी. अब विशेषज्ञों की मदद दोबारा ली जा रही है, ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके और गिलहरी को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके.

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बताया जा रहा है कि यह गिलहरी अक्सर पर्दों के पीछे छिपकर बैठती है और अचानक लोगों पर कूद पड़ती है. इसके कारण विभागों में नियमित कामकाज प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों को काम करने में परेशानी हो रही है.

छात्रों का कहना है कि इस डर के कारण कॉलेज आने वाले छात्रों की संख्या में कमी देखी जा रही है और पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. लगातार हमलों की घटनाओं ने कैंपस के माहौल को असामान्य बना दिया है.

विशेषज्ञों की राय और एहतियात

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी के कारण छोटे जीवों में ब्रेन डिसऑर्डर की समस्या बढ़ सकती है, जिससे उनके काटने की प्रवृत्ति तेज हो जाती है. लंबे समय तक भूखा रहना भी ऐसे जीवों को उग्र बना सकता है.

फिलहाल रेस्क्यू टीम को सफलता नहीं मिली है, लेकिन दावा किया जा रहा है कि जल्द ही गिलहरी को पकड़ लिया जाएगा और सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाएगा.

पशुपालन विभाग की ओर से एहतियात के तौर पर घायलों को टिटनेस के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं ताकि किसी प्रकार का संक्रमण न फैले और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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