राजस्थान के सीकर में चल रहे बाबा श्याम के फाल्गुनी मेले में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. इसी मेले के बीच मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सबलगढ़ निवासी श्याम भक्त सोनू अपनी अनूठी और कठिन भक्ति के कारण देशभर में चर्चा का विषय बन गए हैं. सोनू 2100 लोहे की कीलों से बने लकड़ी के फंटे पर दंडवत लेटकर करीब 17 किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं. उनकी इस साधना के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसे देखकर लोग आश्चर्य और श्रद्धा से भर उठे हैं.
21 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित इस फाल्गुनी मेले में भक्ति के विभिन्न स्वरूप देखने को मिल रहे हैं. कोई भक्त हाथों में ध्वज लेकर यात्रा कर रहा है तो कोई दंडवत करते हुए बाबा के दरबार तक पहुंच रहा है. इसी बीच सोनू की यह अनोखी यात्रा सबसे अलग और विशेष मानी जा रही है. वह पिछले चार दिनों से रींगस से खाटूश्यामजी की ओर लोहे की कीलों पर लेटकर पेट के बल आगे बढ़ रहे हैं.
कीलों पर लेटकर पूरी कर रहे कठिन यात्रा
सोनू जिस फंटे पर लेटकर यात्रा कर रहे हैं, उसमें लगी कीलें करीब 5 इंच लंबी हैं और उनका कुल वजन लगभग 26 किलोग्राम बताया जा रहा है. इन्हीं कीलों पर लेटकर सोनू अपनी आस्था की यह कठिन परीक्षा दे रहे हैं. इस तरह की यात्रा को पेट पलायन कहा जाता है, जिसमें भक्त पूरी श्रद्धा और संकल्प के साथ दंडवत मुद्रा में आगे बढ़ता है.
श्याम भक्त सोनू ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से फाल्गुनी मेले में इसी तरह कठिन साधना करते हुए बाबा श्याम के दरबार में पहुंच रहे हैं. इस वर्ष भी वह एकादशी के पावन अवसर पर बाबा श्याम के दर्शन करने का संकल्प लेकर यात्रा कर रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी एकमात्र मनोकामना है कि बाबा श्याम उन्हें हर वर्ष इसी तरह अपने दरबार में बुलाते रहें.
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श्रद्धालुओं में आस्था और भावनाओं की लहर
सोनू की इस अद्भुत भक्ति को देखकर मार्ग में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो रहे हैं. लोग उनके दर्शन कर रहे हैं, उनके पैर छू रहे हैं और जयकारों के साथ उनका उत्साह बढ़ा रहे हैं. उनकी साधना को देखकर श्रद्धालुओं में आस्था और विश्वास और मजबूत हो रहा है.
सोनू की यह कठिन और अनोखी भक्ति अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गई है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उनके वीडियो और फोटो को देखकर लोग उनकी श्रद्धा और संकल्प की सराहना कर रहे हैं. यह यात्रा केवल एक साधना नहीं, बल्कि बाबा श्याम के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक बन गई है.