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11 साल पहले...भीड़ ने फूल मोहम्मद को जिंदा जला दिया था, DSP समेत 30 दोषी

सवाई माधोपुर के मानटाउन थाना क्षेत्र के सूरवाल गांव में 17 मार्च 2011 को लोग दाखा देवी के हत्यारों को गिरफ्तार करने और पीड़िता के परिजनों को मुआवजे की मांग कर रहे थे. इसी दौरान राजेश मीणा व बनवारी लाल मीणा नामक युवक बोतलों में पेट्रोल लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गए और आत्महत्या की धमकी देने लगे.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के चर्चित सीआई फूल मोहम्मद हत्याकांड मामले में जिला एवं सेशन कोर्ट ने 89 आरोपियों में से 30 को दोषी माना है. इसमें तत्कालीन DSP महेंद्र सिंह भी शामिल है. न्यायालय द्वारा फैसले की विवेचना करने के बाद 18 नवंबर को फैसले की कॉपी उपलब्ध करवाई जाएगी.  

गौरतलब है कि मानटाउन थाना क्षेत्र में 11 साल पहले 17 मार्च 2011 को पुलिस इंस्पेक्टर फूल मोहम्मद को सूरवाल गांव में जीप में जिंदा जला दिया गया था. मामले की जांच सीबीआई ने की. इसमें 89 लोगों के खिलाफ चालान पेश किया था. 11 साल 8 महीने के ट्रॉयल के दौरान मामले में पांच आरोपियों की मौत हो चुकी है. जबकि तीन आरोपी अभी भी फरार हैं. 

दरअसल, सवाई माधोपुर के मानटाउन थाना क्षेत्र के सूरवाल गांव में 17 मार्च 2011 को लोग दाखा देवी के हत्यारों को गिरफ्तार करने और पीड़िता के परिजनों को मुआवजे की मांग कर रहे थे. इसी दौरान राजेश मीणा व बनवारी लाल मीणा नामक युवक बोतलों में पेट्रोल लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गए और आत्महत्या की धमकी देने लगे.

बनवारी को लोगों ने समझाकर नीचे उतार लिया लेकिन राजेश खुद को आग लगाकर टंकी से नीचे कूद गया. इससे उसकी मौत हो गई थी. मौत के बाद गुस्साए लोगों ने मानटाउन थाने के सीआई फूल मोहम्मद व पुलिस जवानों पर पथराव कर दिया. जान बचाने के प्रयास में फूल मोहम्मद जीप चलाकर भागने लगे तो भीड़ ने उन पर पथराव कर दिया. 

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पत्थर लगने से फूल मोहम्मद घायल हो गए. इसके बाद भीड़ ने जीप पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी. इससे उनकी मौत हो गई. घटना के समय मौके पर तत्कालीन डीएसपी महेंद्र सिंह कालबेलिया मौजूद थे और लेकिन उन्होंने सुध नहीं ली. इस घटना के लिए कालबेलिया को जिम्मेदार ठहराया गया. जांच के दौरान भी सीबीआई ने महेंद्र सिंह को दोषी माना था.

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, इस हत्याकांड में कालबेलिया का जुर्म साबित करने में मानटाउन थाने का हिस्ट्री शीटर संजय बिहारी सबसे अहम गवाह था. संजय के बयान न्यायाधीश के समक्ष होने से पहले ही उसकी जयपुर में हत्या हो गई थी. 

(रिपोर्ट- सुनील जोशी)

 

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