
राजस्थान के फतेहपुर शेखावाटी में एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया. रघुनाथपुरा गांव के एक ही परिवार की सात महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई. यह हादसा उस वक्त हुआ, जब परिवार अंतिम संस्कार में शामिल होकर लक्ष्मणगढ़ से अपने गांव लौट रहा था.
'पहले ही कहा था गाड़ी धीरे चलाना...'
सबसे पीड़ादायक पहलू यह रहा कि रवाना होने से पहले परिजनों ने ड्राइवर को गाड़ी धीरे चलाने की सख्त हिदायत दी थी, लेकिन उसने इस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया.
फतेहपुर सदर थाना के सीआई सुरेंद्र सिंह देगड़ा के अनुसार, रघुनाथपुरा गांव निवासी मोहनीदेवी की ननद कैलाशदेवी का निधन हो गया था. अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए परिवार लक्ष्मणगढ़ गया था. शाम करीब चार बजे चार गाड़ियों में सवार होकर सभी गांव लौट रहे थे. एक कार में महिलाएं बैठी थीं, जबकि अन्य तीन वाहनों में पुरुष सवार थे. हरसावा गांव के पास तेज रफ्तार कार ने ओवरटेक करने की कोशिश की. इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर पहले एक पिकअप से टकराया और फिर सामने से आ रहे ट्रक में जा घुसा. टक्कर इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और उसमें सवार महिलाएं व चालक अंदर ही फंस गए.

ड्राइवर समेत दो गंभीर रूप से घायल
हादसे में सास 80 साल की मोहनीदेवी , सगी बहुएं 55 साल की चंदादेवी, 45 साल की तुलसीदेवी , 35 साल की बरखा देवी , 60 साल की बेटी इंदिरा , चचेरी बहुएं 60 साल की आशादेवी और 45 साल की संतोषदेवी की मौत हो गई. इनमें से तीन महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, तीन ने धानुका अस्पताल में दम तोड़ा, जबकि बरखा देवी ने जयपुर ले जाते समय अंतिम सांस ली. दुर्घटना में 35 साल की सोनू और 25 साल की चालक वसीम गंभीर रूप से घायल हो गए.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लक्ष्मणगढ़ से रवाना होने से पहले परिवार के लोगों ने चालक वसीम से साफ कहा था कि महिलाओं को लेकर जा रहा है, इसलिए गाड़ी धीरे चलाए. बावजूद इसके उसने तेज रफ्तार में ओवरटेक करने की कोशिश की, जो इस भयावह हादसे की वजह बनी.
गांव के किसी घर में नहीं दला चूल्हा
घटना की सूचना मिलते ही विधायक हाकम अली, भाजपा नेता श्रवण चौधरी, एडीएम रतनलाल स्वामी, एएसपी डॉ. तेजपाल सिंह सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे. राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है. एक ही परिवार की सात महिलाओं की मौत से रघुनाथपुरा गांव में मातम पसरा है, जहां उस रात किसी घर में चूल्हा नहीं जला.
एक ही परिवार की सात महिलाओं की मौत की खबर जैसे ही रघुनाथपुरा गांव में फैली, पूरे गांव में मातम छा गया. हर घर में खामोशी पसर गई और गली-मोहल्लों में सन्नाटा दिखाई दिया. इस दुखद घटना के बाद उस रात गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला. मोहिनी देवी के पति का निधन पहले ही हो चुका था और परिवार की जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर ही थी.
संतोष देवी के पति सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और उनके दो बेटे तथा एक बेटी हैं. वहीं तुलसी देवी के पति विदेश में मजदूरी करते हैं और छुट्टी पर गांव आए हुए थे. आशा देवी के पति गैस एजेंसी में नौकरी करते हैं. एक साथ इतनी महिलाओं की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.