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20 हजार करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में बड़ा एक्शन, पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार

जल जीवन मिशन से जुड़े 20 हजार करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले में राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो की एसआईटी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को जयपुर स्थित आवास से तड़के गिरफ्तार किया. एसीबी के अनुसार फर्जी प्रमाणपत्रों और मिलीभगत से करोड़ों के टेंडर दिलाने का आरोप है. कोर्ट ने आरोपी को 11 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है.

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एसआईटी ने कोर्ट से लिया 5 दिन का रिमांड.(File Photo: ITG)
एसआईटी ने कोर्ट से लिया 5 दिन का रिमांड.(File Photo: ITG)

जल जीवन मिशन से जुड़े कथित 20 हजार करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो की एसआईटी ने गहलोत सरकार के पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया है. एसीबी ने प्रकरण संख्या 245/2024 में कार्रवाई करते हुए उन्हें गुरुवार सुबह करीब साढ़े चार बजे जयपुर स्थित आवास से हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया. बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया. एसीबी के अनुसार मामले में पूछताछ और जांच जारी है.

जांच एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई जल जीवन मिशन में कथित व्यापक भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है. एसीबी का कहना है कि शुरुआती जांच में बड़े स्तर पर मिलीभगत और नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं. इसी क्रम में आरोपी पूर्व मंत्री को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.ॉ

यह भी पढ़ें: राजस्थान: पूर्व मंत्री महेश जोशी के आधा दर्जन ठिकानों पर ED की छापेमारी, जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़ा है मामला

एसीबी ने बताया कि इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है. एजेंसी का कहना है कि इस पूरे मामले में और भी अहम खुलासे होने की संभावना है.

फर्जी प्रमाणपत्रों से 960 करोड़ के टेंडर लेने का आरोप

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जांच में सामने आया कि मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कम्पनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कम्पनी के प्रोपराइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र तैयार किए. आरोप है कि इन प्रमाणपत्रों के आधार पर राजस्थान में विभिन्न टेंडर हासिल किए गए.

एसीबी के अनुसार तत्कालीन पीएचईडी मंत्री महेश जोशी और तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल ने निजी दलाल संजय बड़ाया सहित अन्य लोगों के साथ मिलीभगत कर इन फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर दिलाने में भूमिका निभाई. जांच में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई है.

एसीबी ने कहा कि यह मामला केवल कुछ टेंडरों तक सीमित नहीं है बल्कि व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं.

टेंडर प्रक्रिया में नियम बदलकर ‘टेंडर पुलिंग’ का आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि 50 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में साइट विजिट प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को नियमों के विपरीत शामिल किया गया. आरोप है कि इससे बोली लगाने वालों की पहचान उजागर हो जाती थी और टेंडर पुलिंग संभव हो पाती थी.

एसीबी के मुताबिक इस प्रक्रिया के कारण 30 से 40 प्रतिशत तक अप्रत्याशित ऊंचा टेंडर प्रीमियम मिला, जिसे विभागीय अधिकारियों ने मंजूरी दी. एजेंसी का दावा है कि इससे बड़े पैमाने पर पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के प्रमाण मिले हैं. कुल टेंडरों की राशि लगभग 20 हजार करोड़ रुपये बताई गई है.

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जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में आगे भी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की जांच जारी रहेगी.

पहले 11 आरोपी गिरफ्तार, तीन फरार घोषित

एसीबी के अनुसार इस प्रकरण में अब तक 11 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, मुख्य अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारी शामिल हैं. एक निजी व्यक्ति को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था.

तीन फरार आरोपियों के खिलाफ अदालत ने स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं और उन्हें उद्घोषित अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है. वहीं राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तारी से राहत प्रदान की है.

एसीबी ने बताया कि आरोपी महेश जोशी को अदालत में पेश करने के बाद 11 मई 2026 तक एसीबी रिमांड मंजूर किया गया है और मामले में आगे पूछताछ जारी रहेगी.

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