देश के हर घर तक पाइप से पीने का पानी पहुंचाने की केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना 'जल जीवन मिशन' से जुड़े करीब 960 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है. एसीबी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी के करीबी माने जाने वाले संजय बड़ाया को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है. वह थाईलैंड से लौटा था. कोर्ट ने उसे तीन दिन की रिमांड पर एसीबी को सौंप दिया है. जांच एजेंसियों ने संजय बड़ाया को इस घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है.
ये घोटाला राजस्थान में जल जीवन मिशन के तहत होने वाले निर्माण कार्यों में टेंडर देने से जुड़ा है. पैसे के लेन-देन में धांधली, काम की घटिया गुणवत्ता और सरकारी फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप है. इस मामले में पहले भी जांच हो चुकी है. ईडी ने 2024 में संजय बड़ाया को अरेस्ट किया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी. राजस्थान एसीबी ने गत 7 मई को राजस्थान के पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को भी इस केस में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है.
तीन आरोपी हैं अब भी फरार
इस मामले में तीन अन्य आरोपी फरार हैं. जांच एजेंसियां उनकी तलाश कर रही हैं. इस मामले में पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल समेत कई अन्य पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं. एसीबी ने 10 आरोपियों के खिलाफ 16000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. ईडी ने भी मामले में पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था और आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी करके करोड़ों की संपत्ति जब्त की. राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो और ईडी की जांच में सामने आया कि कुछ खास कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किए गए.
जांच एजेंसियों के मुताबिक खास कंपनियों से कमीशन लेकर उन्हें जल जीवन मिशन के तहत निर्माण कार्यों के कॉन्ट्रैक्ट दिलाए गए. जांच में सामने आया कि दो निजी कंपनियों 'श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी' और 'श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी' ने कथित तौर पर फर्जी वर्क कम्प्लीशन सर्टिफिकेट लगाकर करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए. सर्टिफिकेट कथित रूप से इरकॅान इंटरनेशनल के नाम से बनाए गए थे और कई जगहों पर पाइपलाइन और वाटर सप्लाई के काम में घटिया गुणवत्ता और फर्जी बिलिंग के आरोप भी लगे हैं. मामले में राजस्थान एसीबी और ईडी की जांच जारी है.