भ्रष्टाचारी अच्छी-अच्छी योजनाओं में अपने करप्शन का हिस्सा निकालने का रास्ता लगातार खोज रहे हैं. क्या यही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के साथ भी हो रहा है. अगर हां, तो ऐसे भ्रष्टाचारियों के घर की कुर्की कराकर जनता का पैसा वसूलना जरूरी है.
खबर राजस्थान से है, जहां के कृषि मंत्री ने एसबीआई की एक शाखा में जाकर पीएम फसल बीमा योजना के किसानों की सूची मांगी. दावा है कि शाखा के अधिकारी दो घंटे तक आनाकानी करते रहे. आरोप है कि जब सूची दी गई, तो उसमें ऐसे लोगों के नाम थे जो न किसान थे और न ही उनके पास जमीन थी.
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का दावा है कि ग्यारह सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का क्लेम बैंक और बीमा कंपनी के अधिकारी पूरे राजस्थान में हड़प बैठे हैं.
योजना का मकसद और वर्तमान आरोप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फसल बीमा योजना शुरू करते समय कहा था कि अगर किसान की फसल तैयार होकर खेत से बाजार जाने के बीच किसी बड़ी आपदा का शिकार हो जाए, तो उसे भी बीमा का लाभ मिलेगा. पानी भर जाए तो बीमा. किसान बुआई कर दे और बारिश न आए तो भी बीमा. मकसद यह था कि किसान को न्यूनतम सुरक्षा मिल सके.
लेकिन आरोप है कि किसानों से जुड़ी इस बड़ी योजना में भ्रष्टाचारियों ने अपनी कमाई की फसल लहलहा ली. दावा है कि अकेले राजस्थान में फसल बीमा योजना के नाम पर फर्जी किसानों के जरिए संगठित मिलीभगत से 1150 करोड़ रुपये खातों में डाल लिए गए.
दस्तावेजों में संदिग्ध नाम
दस्तावेजों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों के नाम पर बीमा क्लेम लिया गया, उनका कोई अता-पता नहीं है. कहा जा रहा है कि यह खुलासा खुद राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने किया.
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चुरू जिले के सालासर स्थित एसबीआई शाखा पर आरोप है कि शाखा प्रबंधक, अन्य बैंक कर्मचारियों और बीमा कंपनी से जुड़े लोगों ने मिलकर फर्जी बीमा पॉलिसियां जारी कीं. ऐसी जमीनों के नाम बीमा किया गया जो अस्तित्व में ही नहीं थीं. ऐसे किसानों के नाम बीमा किया गया जो कहीं दर्ज ही नहीं हैं. फर्जी पॉलिसियां बनाकर क्लेम हड़पने की तैयारी थी. अकेले एक शाखा में 71 फर्जी किसान पकड़े जाने का दावा किया गया है.
करोड़ों के फर्जीवाड़ा को लेकर FIR दर्ज
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा शुक्रवार को एसबीआई की सालासर में शाखा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किए गए घोटाले को उजागर करने के बाद शनिवार को एफआईआर दर्ज करवाई गई. इस संबंध में दी गई रिपोर्ट के आधार पर गंभीर आपराधिक षड्यंत्र, राजकोषीय हानि और किसानों के साथ धोखाधड़ी हुई हैं. मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी गई है.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सालासर शाखा, जिला चूरू के शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सारस्वत, बैंक कर्मचारी भागीरथ नायक (फसल बीमा पॉलिसी जारीकर्ता) और अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों/प्रतिनिधियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी बीमा पॉलिसियां जारी कीं.
बज्जू तेजपुरा पटवार मंडल और ग्राम बज्जू खालसा (तहसील गजनेर, जिला बीकानेर) के विभिन्न चकों - चक 11 एनबीएम 7-8 टीपीएम, 1, 2-3 टीपीएसएम, 6, 7, 8, 9 एनबीएम 6-7 5एम, 3, 4, 5, 6 टीपीएम की ऐसी भूमि का बीमा दर्शाया गया, जो राजस्व अभिलेखों में अस्तित्व में ही नहीं पाई गई.
राजस्व रिकॉर्ड से नहीं हुआ मिलान
तहसीलदार गजनेर, जिला बीकानेर से प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित कृषकों के नाम, सर्वे नंबर, मुरब्बा एवं खसरा नंबरों का मूल राजस्व रिकॉर्ड से मिलान नहीं हुआ. इसके बावजूद सालासर शाखा द्वारा 71 कथित किसानों के नाम पर फर्जी कृषि भूमि दर्शाकर लगभग 13 लाख 51 हजार रुपये किसानों के प्रीमियम के रूप में जमा करवाए गए. इसके अतिरिक्त राज्य सरकार और भारत सरकार का अंश मिलाकर लगभग 15 लाख 76 हजार 348 रुपये राजकोष से जमा होना बताया गया है। इस प्रकार कुल क्लेम राशि लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
सिस्टम में गंभीर लापरवाही के संकेत
यहां तक कि कुछ पॉलिसियों में किसान का नाम और पिता का नाम एक ही दर्ज कर दिया गया. इससे पूरे सिस्टम में गंभीर लापरवाही और गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं.
9 करोड़ का भुगतान रोका, 15 हजार फर्जी किसानों की आशंका
किरोड़ी लाल मीणा का कहना है कि 9 करोड़ रुपये का भुगतान रुकवाया गया. उनका दावा है कि करीब 15 हजार किसान फर्जी हो सकते हैं और 1150 करोड़ रुपये की अनियमितता हुई है. आरोप है कि बैंक कर्मी, सर्वे करने वाले और अन्य लोगों ने मिलीभगत कर यह रकम हड़प ली.
एसओजी जांच की तैयारी, मामला विधानसभा तक पहुंचा
यह मामला अब विधानसभा तक पहुंच चुका है. मंत्री ने कहा है कि संगठित अपराध की आशंका है और एसओजी से जांच कराई जाएगी.
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आशंका जताई जा रही है कि फर्जी किसानों के नाम पर बैंक और बीमा कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई. असली किसान पूरा मुआवजा नहीं पा रहा, जबकि नकली नामों पर पैसा निकाला जा रहा है.
देशव्यापी जांच की मांग
ऐसे में देशव्यापी जांच की मांग उठ रही है, ताकि एक महत्वपूर्ण योजना को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके और असली किसानों का हक सुरक्षित रखा जा सके.