राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व के बालेर रेंज के गांवों में लंबे समय से दहशत का कारण बना 7 वर्षीय शरारती नर भालू अब कोटा पहुंचने के बाद भी अपने आक्रामक व्यवहार से बाज नहीं आ रहा. गांवों में घरों में घुसकर दूध-दही खाने और दुकानों से गुड़ चुराने की आदत के कारण चर्चा में रहे इस भालू को वन विभाग ने रेस्क्यू कर कोटा भेजा था, लेकिन यहां भी उसने उत्पात मचाना शुरू कर दिया है.
शुक्रवार रात रेस्क्यू कर लाए गए इस भालू को नयापुरा चिड़ियाघर में शिफ्ट किया गया. यहां पहुंचते ही भालू ने अपनी ताकत दिखाते हुए पिंजरे की भारी-भरकम जालियों को तोड़ डाला. इतना ही नहीं, बाहर निकलने की कोशिश में उसने करीब दो फीट तक जमीन भी खोद डाली. इस घटना के बाद चिड़ियाघर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है.
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कोटा वन्यजीव मंडल के अधिकारियों के अनुसार यह भालू रणथंभौर टाइगर रिजर्व के आसपास के गांवों में पिछले कुछ समय से दहशत का पर्याय बना हुआ था. इंसानी बस्तियों में घुसकर खाने-पीने का सामान चुराने की इसकी आदत के चलते किसी संभावित जनहानि की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने इसे रेस्क्यू करने का निर्णय लिया. फिलहाल भालू को पुराने चिड़ियाघर में कड़ी निगरानी में रखा गया है.
पिंजरे में की गई है
अधिकारियों के मुताबिक भालू रातभर आक्रामक बना रहा, ऐसे में उसे सुरक्षित तरीके से पिंजरे में रखना जरूरी था. असिस्टेंट फॉरेस्टर वाइल्डलाइफ प्रेम कंवर ने बताया कि भालू को पिंजरे में छोड़ा गया है और उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है.
डीसीएफ अनुराग भटनागर ने बताया कि भालू के लिए कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं. साथ ही उसकी पसंद के अनुसार चीकू, पपीता, शहद और गाजर सहित अन्य भोजन की व्यवस्था की जा रही है, ताकि उसे शांत रखा जा सके. वन विभाग की टीम फिलहाल भालू के व्यवहार पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी किए जाएंगे, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके.