scorecardresearch
 

कोटा: प्रसूताओं का कब्रगाह बना जेकेलोन अस्पताल, अब तक 4 की मौत... कई की किडनी फेल

कोटा के सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत और किडनी फेल होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. अब जेकेलोन अस्पताल में भर्ती पिंकी महावर की मौत के बाद मृतकों की संख्या 4 हो गई है, जबकि 9 महिलाओं में किडनी फेल्योर की शिकायत सामने आई है. परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही और सही इलाज न देने के आरोप लगाए हैं.

Advertisement
X
कोटा में अब तक 4 प्रसूताओं की हुई मौत. (Photo: Screengrabs)
कोटा में अब तक 4 प्रसूताओं की हुई मौत. (Photo: Screengrabs)

कोटा के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और तबीयत बिगड़ने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. अब जेकेलोन अस्पताल में भर्ती एक और महिला की मौत हो गई है. इसके साथ ही अब तक कुल 13 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 4 महिलाओं की जान जा चुकी है, जबकि 9 महिलाओं में किडनी फेल होने की शिकायत सामने आई है. लगातार बढ़ते मामलों के बाद न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेकेलोन अस्पताल दोनों में दहशत का माहौल है.

जेकेलोन अस्पताल में डीसीएम श्रीराम कॉलोनी निवासी पिंकी पत्नी चंद्र प्रकाश महावर की डिलीवरी के बाद हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी. रविवार देर रात उसे सुपर स्पेशियलिटी विंग में शिफ्ट किया गया, लेकिन इलाज के दौरान रात करीब 12:30 बजे उसकी मौत हो गई. अस्पताल प्रशासन के अनुसार महिला की स्थिति पहले से ही नाजुक थी और उसे लगातार मॉनिटर किया जा रहा था.

इस बीच जेकेलोन अस्पताल में भर्ती महिलाओं की संख्या को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. पहले केवल एक मरीज भर्ती होने की बात कही जा रही थी, लेकिन अब तीन महिलाओं के भर्ती होने की जानकारी सामने आई है. इनमें सभी की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि एक महिला की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है.

5 सदस्यीय कमेटी कर रही है जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन, जांच के लिए गठित 5 सदस्यीय कमेटी और संबंधित विभागों के प्रोफेसर रविवार को जेकेलोन अस्पताल पहुंचे. टीम ने मरीजों की स्थिति, इलाज की प्रक्रिया और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की. अब तक सामने आए 13 मामलों में से 4 महिलाओं की मौत हो चुकी है. इनमें एक महिला की मौत हार्ट संबंधी समस्या से होना बताया गया है, जबकि 3 महिलाओं की मौत किडनी फेल्योर के कारण हुई.

Advertisement

लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार जांच कमेटी ने जेकेलोन अस्पताल के हालात को न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सामने आए घटनाक्रम से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ नहीं माना है. बताया जा रहा है कि जेकेलोन में दो दिन के दौरान 52 सिजेरियन डिलीवरी हुई थीं, जिनमें 5 से 6 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी. इनमें कई महिलाओं को पहले से हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया था, जबकि कुछ अन्य अस्पतालों से रेफर होकर आई थीं. इसी आधार पर जांच टीम फिलहाल इन मामलों को अलग एंगल से भी देख रही है.

परिजनों के मुताबिक ऑपरेशन के करीब सात घंटे बाद पिंकी की किडनी ने काम करना लगभग बंद कर दिया था. उसकी जेठानी संतोष ने बताया कि 8 मई की सुबह करीब आठ बजे यूरिन बैग खाली किया गया था. इसके बाद दोबारा बैग लगाने पर यूरिन आना बंद हो गया. परिवार ने कई बार डॉक्टरों को बताया कि महिला को यूरिन नहीं हो रहा और पेट में तेज दर्द है, लेकिन डॉक्टरों ने इसे सामान्य बताते हुए नजरअंदाज कर दिया.

बच्चेदानी निकालने के बाद भी नहीं भेजा गया जांच के लिए
परिवार का आरोप है कि दोपहर तीन बजे तक भी कोई गंभीर मेडिकल कदम नहीं उठाया गया. सिर्फ दवाइयां और इंजेक्शन दिए जाते रहे. जब लगातार यूरिन आउटपुट बंद रहा तब जाकर पिंकी को आईसीयू में शिफ्ट किया गया. इसके बाद परिजनों को बताया गया कि बच्चेदानी में खून जम गया है और दोबारा ऑपरेशन करना पड़ेगा. पंद्रह घंटे के भीतर पिंकी का दो बार ऑपरेशन किया गया. दूसरे ऑपरेशन में उसकी बच्चेदानी निकाल दी गई. परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद निकाली गई बच्चेदानी को जांच के लिए भेजने के बजाय एक डिब्बे में रखकर बेड के पास ही छोड़ दिया गया. 10 मई तक भी वह वहीं पड़ी रही. इस बीच पिंकी की हालत लगातार बिगड़ती गई और उसे वेंटिलेटर पर लेना पड़ा.

Advertisement

परिवार का कहना है कि 8 मई से ही पिंकी बेहोशी की हालत में थी, लेकिन इसके बावजूद उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर नहीं किया गया. उस समय तक लगातार किडनी फेल्योर के मामले सामने आ रहे थे और दो महिलाओं को जेकेलोन से एसएसबी ब्लॉक रेफर भी किया जा चुका था. इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने पिंकी को आईसीयू में ही रखा और मामले की जानकारी बाहर नहीं आने दी.

सवाल, महिलाओं की मौत का जिम्मेदार कौन?
मृतका के पति चंद्रप्रकाश महावर ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन लगातार स्थिति छिपाने की कोशिश करता रहा. परिवार को आईसीयू के बाहर रखा गया और अंदर सिर्फ एक महिला सदस्य को ही जाने दिया जाता था.डॉक्टर सिर्फ इतना कहते रहे कि इलाज चल रहा है, लेकिन बीमारी की असली स्थिति नहीं बताई गई. परिजनों को कई कागजों पर साइन करवाए गए, लेकिन यह नहीं बताया गया कि आखिर समस्या क्या है?

इसके बावजूद लगातार हो रही मौतों और गंभीर होती मरीजों की हालत ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं, संक्रमण नियंत्रण, ऑपरेशन के बाद मॉनिटरिंग और प्रसूताओं की देखरेख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. अब हर किसी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है कि आखिर डिलीवरी के बाद महिलाओं की हालत अचानक क्यों बिगड़ रही है और इन मौतों का असली जिम्मेदार कौन है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement