राजस्थान के जयपुर से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. एक पिता ने दिहाड़ी मजदूरी कर अपने चार बेटों को पढ़ाया. फिर उन्हें रोजगार के काबिल बनाया. इतना ही नहीं उनकी शादियां कर उनका घर भी बसाया. मगर, जब बेटों की फर्ज निभाने की बारी आई, तो बुजुर्ग पिता को ठुकरा दिया. चारों बेटों ने अपने दायित्व को निभा नहीं सका.
परेशान मजदूर पिता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इसपर अदालत ने चारों बेटों को उम्रभर पिता को एक वक्त का नाश्ता और दो वक़्त की रोटी खिलाने का फैसला सुनाया हैं. दरअसल, जयपुर के शास्त्री नगर के रहने वाले बुजुर्ग गोपाल लाल ने वरिष्ठ नागरिको के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम के तहत एसडीएम कोर्ट जयपुर शहर उत्तर में प्रार्थना पत्र दिया था.
भरण पोषण नहीं करने का और मारपीट का लगाया आरोप
इसमें पिता ने लिखा कि चारों बेटे उनका भरण पोषण नहीं कर रहें है और उससे मारपीट करते है. पिता ने ये भी आरोप लगाया कि उनकी जमा पूंजी भी हड़प ली है. इसके बाद उनके पास अब कोई साधन नहीं है. इसलिए उनके बेटों से उसके घर का कब्जा हटाकर उसको संभाला जाए और भरण पोषण राशि दिलाई जाए. इसके जवाब में कोर्ट में बेटों ने कहां कि वे पिता का खाने-पीने सहित चिकित्सा और अन्य खर्च उठाने को तैयार है.
कोर्ट का आदेश- पिता को पौष्टिक भोजन कराएं
मगर, उन पर लगाए गए आरोप गलत है. उलटे पिता को जो वृद्धवस्था पेंशन मिलती है उससे शराब पीकर घर में हुड़दंग मचाते है. इसके बाद कोर्ट ने भरण पोषण से जुड़े मामले में गोपाल लाल के बेटे मनमोहन, चंद्रमोहन, हरिमोहन और रविमोहन को पाबंद करते हुए कहां कि वे उम्र भर अपने पिता को पौष्टिक भोजन करवाएंगे. यही नहीं बीमार पड़ने पर चिकित्सा सेवाएं भी देंगे.
पिता को खर्च के लिए हर माह 2000 रुपए दें
इसके अलावा अन्य खर्च के लिए हर माह 2000 रुपए और देंगे, जिसमें हर एक बेटा 500 रुपए देंगे. इसकी जिम्मेदारी एसडीएम कोर्ट ने भट्टा बस्ती थानेदार को दी है. साथ ही कोर्ट ने प्रार्थी पिता को भी पाबंद किया है कि वह शराब पीकर घर में कोई गलत आचरण नहीं करें.