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26/11 के बाद हम कितने तैयार हैं?

26/11 ये तारीख़ ग़म और ग़ुस्से की ऐसी कशमकश का नाम है जो बेचैन करती है. ये दिन मुंबई की आंखों में ठहरे हुए आंसू की तरह है. चार साल पहले आंसुओं की उंगली पकड़कर नफ़रत से मुक़ाबला करने निकल पड़ा था ये शहर पर इससे पहले कि 26/11 का ग़ुस्सा अपना आपा खो बैठता इस शहर ने हर हाथ में पत्थर की जगह मोमबत्तियां थमा दी थीं. पर क्य़ा इस 26/11 से हमने कुछ सीखा?

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