scorecardresearch
 

बेटी के दामन पर बाप का खून

बेटी के दामन पर बाप का खून

छोटे बड़े और गहरे-हलके आंगन-आंगन पलते हैं, जैसी ज़रूरत होती है ये वैसे रंग बदलते हैं. जी हां, मैं रिश्तों की बात कर रहा हूं. पर उन रिश्तों की जो जब बदलते हैं तो भूचाल आ जाता है. रिश्तों की ज़मीन पर लिखी गई धोखे और फ़रेब की ये वो कहानी हैं जो आपको झकझोर कर रख देगी.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें