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जिस्मफरोशी की गली से शुरू आशिकी, बीच सड़क पर खत्म

27 फरवरी को जिस सतविंदर सिंह की लाश दिल्ली के गीता कॉलोनी फ्लाईओवर पर मिली थी, उसकी हत्या की गुत्थी अब सुलझ चुकी है.

दिल्ली के एक बिजी फ्लाई ओवर पर एक शख्स की लाश मिलती है. लेकिन इस लाश पर ना तो चोट के निशान हैं. ना ही आस-पास कोई ऐसी चीज जिससे मौत की वजह पता चल सके. अलबत्ता लाश की जेब से एक तस्वीर, हाथ पर गुदा एक टैटू और एक मोबाइल नंबर जरूर मिलता है. इन्हीं चीजों के सहारे जब तफ्तीश आगे बढ़ती है, तो कत्ल की एक अजीब और चौंकानेवाली कहानी सामने आती है.

27 फरवरी को पूर्वी दिल्ली के गीता कॉलोनी फ्लाईओवर पर एक 45 साल के शख्स बरामद हुई. पुलिस को वहां से गुजरनेवालों ने सूचना दी और फौरन दरियागंज थाने की पुलिस पूरे लवाजमे के साथ मौका-ए-वारदात पर मौजूद थी.

वैसे भी किसी रिहायशी इलाके से दूर एक बिज़ी रोड पर इस तरह मरनेवाले के बारे में कोई जानकारी मिलने की उम्मीद भी कम ही थी. ऐसे में अभी ये बात भी साफ नहीं थी कि इस शख्स की मौत किसी सड़क हादसे की वजह से हुई या फिर किसी ने इसे मौत के घाट उतार कर सड़क के किनारे ही ठिकाने लगा दिया था

लाश पर चोट का कोई भी निशान नहीं मिला. लेकिन तलाशी लेते ही उसकी जेब से पुलिस को दिल्ली मेट्रो का एक स्मार्ट कार्ड और कुछ दस्तावेज हाथ लगे. इन दस्तावेजों में एक शख्स की तस्वीर के अलावा एक पेपर पर किसी का नाम और एक मोबाइल फोन नंबर भी लिखा था. इत्तेफाक से ये तस्वीर मरनेवाले की ही थी. जबकि ये नाम था सतविंदर सिंह का. लेकिन ये लाश सतविंदर सिंह की थी या फिर किसी और की, पुलिस के लिए अभी ये पता लगाना बाकी था. लाश की तलाशी के दौरान ही पुलिस की निगाह मरनेवाले की दायीं बाजू पर गुदे टैटू पर पड़ी. टैटू में लिखा था, आई लव यू स्वीटी. यानी मरनेवाला जो भी था, वो स्वीटी नाम की किसी लड़की से प्यार करता था.

पोस्टमॉर्टम में पता चला कि शख्स की हत्या की गई थी. पुलिस ने अब टेक्नीकल सर्विलांस की मदद ली. लाश की जेब से मिले मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकलवा ली गई. लेकिन कॉल डिटेल पर निगाह डालते ही तफ्तीश में लगी पुलिस को तीसरा झटका लगा. वो ये कि अपनी मौत से पहले इस शख्स ने दिल्ली की बदनाम गलियों में कुछ नंबरों पर अनगिनत बार बातचीत की थी. अब पुलिस कॉल डिटेल्स के पन्ने पलटती हुई पीछे जाने लगी. लेकिन हर पन्ने पर कुछ ऐसे नंबर जरूर थे, जिनका ताल्लुक जीबी रोड से था. यानी मरनेवाले का जीबी रोड से कोई ना कोई लेना-देना जरूर था.

जब जीबी रोड के बीट कांस्टेबल ने सतविंदर सिंह की तस्वीर को देखते ही उसे पहचान लिया. बीट कांस्टेबल ने दरियागंज थाने की पुलिस टीम को बताया कि सतविंदर सिंह नॉर्थ दिल्ली का एक ऐसा कारोबारी था, जो अक्सर जीबी रोड के जिस्मफरोशी के अड्डों पर आया करता था. यहां कोठों में अपने जिस्म का सौदा करनेवाली कई लड़कियों से उसकी अच्छी-खासी नजदीकी भी थी.

इसी बीच जब पुलिस ने उसकी बांह पर गुदे टैटू में लिखे नाम 'स्वीटी' के बारे में पता करने की कोशिश की, तो ये भी साफ हो गया कि ये स्वीटी कोई और नहीं बल्कि यहीं एक कोठे की मालकिन है, जिसके पास सतविंदर अक्सर आया करता था. स्वीटी ने सतविंदर को जानने की बात तो कुबूल की, लेकिन उसके क़त्ल के बारे में कुछ भी पता होने से इनकार कर दिया. स्वीटी ने बताया कि तलाकशुदा सतविंदर पहले उससे बेइंतेहा प्यार करता था.

लेकिन गुज़रते वक्त के साथ सतविंदर की ज़िंदगी में स्वीटी की जगह एक और लड़की आ चुकी थी. ये लड़की थी पूनम जो स्वीटी के इसी कोठे पर कभी जिस्मफरोशी का धंधा किया करती थी. लेकिन सतविंदर से उसकी नज़दीकियों के चलते ही स्वीटी ने पूनम को अपने कोठे से निकाल दिया था. पुलिस को पता चला कि इन दिनों पूनम पूर्वी दिल्ली के शकरपुर इलाके से ही जिस्मफरोशी का धंधा चलाती है. सतविंदर के कातिल की तलाश में अब पुलिस शकरपुर में पूनम के फ्लैट तक जा पहुंची. पुलिस की कड़ी पूछताछ के दौरा उसने गुनाह कबूल कर लिया

. पूनम ने खुलासा किया कि पूनम ने 25 फरवरी को सतविंदर की गला दबाकर हत्या कर दी थी. मर्डर की वजह बस इतनी थी कि सतविंदर के हाथ कहीं से 50 हजार रुपये लगे थे. उनमें से पूनम के हिस्से केवल 2 हजार रुपये. लालच में आकर पूनम ने शराब के नशे में धुत सतविंदर को मार डाला. फिर मौसी और एक ऑटोवाले की मदद से लाश को सड़क किनारे ठिकाने लगा दिया.

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