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श्‍वेतपत्र

कौन कर रहा है टारगेट? मुसलमानों के 'मन की बात' पर श्वेतपत्र!

04 जून 2022

क्या बुलडोजर के बहाने में देश में हिन्दू मुसलमान हो रहा है? उत्तर प्रदेश में हुए एनकाउंटर पर भी हिंदू-मुसलमान की सियासत शुरू हो गई थी. ज्ञानवापी और कुतुब मीनार को लेकर जो विवाद चल रहा है उसको भी कई राजनेता मुसलमानों को टारगेट किए जाने के रूप में देख रहे हैं. सियासत में वोट बैंक हमेशा से ही धर्म और मजहब में बंट कर रह जाता है. पर राजनीति से परे क्या मुसलमानों को सचमे किया जा रहा है टारगेट या ये महज उनको भड़काने के लिए एक राजनीतिक साजिश है? इन मुद्दों को लेकर क्या सोचता है मुस्लिम समाज? मुसलमानों के 'मन की बात' पर श्वेता सिंह के साथ देखें श्वेतपत्र!

क्या वर्शिप एक्ट से हल होगा काशी विवाद? देखें श्वेतपत्र

21 मई 2022

Gyanvapi Case: काशी में ज्ञानवापी का विवाद अब काफी तूल पकड़ चुका है लेकिन एक एक्ट है जिसके बारे में काफी चर्चा हो रही है और इसी कानून का हवाल इस पूरे केस में बार बार दिया भी जा रहा है. इस एक्ट का नाम है वर्शिप एक्ट. द प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट 1991 की धारा 3 कहती है कि धार्मिक स्थलों को उसी रूप में संरक्षित किया जाएगा, जिसमें वह 15 अगस्त 1947 को था. अगर ये सिद्ध भी होता है कि मौजूदा धार्मिक स्थल को इतिहास में किसी दूसरे धार्मिक स्थल को तोड़कर बनाया गया था, तो भी उसके अभी के वर्तमान स्वरूप को बदला नहीं जा सकता. श्वेतपत्र के इस एपिसोड में देखें कि क्या वर्शिप एक्ट से हल होगा काशी विवाद?

अंग्रेजों के जमाने का कानून कितना जरुरी? देखिए 'श्वेतपत्र'  

14 मई 2022

अंग्रेजों के जमाने का राजद्रोह कानून कुछ दिनों से चर्चा में है. राजद्रोह को अपराध बनाने वाली आईपीसी की धारा 124A की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. इन याचिकाओं पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक कानून की समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक इसका इस्तेमाल नहीं हो सकेगा. देशद्रोह क्या है? राजद्रोह की परिभाशा क्या है? इस ही विषय पर श्वेता सिंह के साथ देखें देशद्रोह कानून पर 'श्वेतपत्र'.

चिलचिलाती गर्मी से राहत कब? सूरज के टॉर्चर पर देखें 'श्वेतपत्र'

08 मई 2022

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भीषण लू और गर्मी की चपेट में है. ये हालात सिर्फ दिल्ली के नहीं हैं बल्कि देशभर में कई इलाकों में गर्मी का भयानक प्रकोप है. देश की राजधानी दिल्ली में मार्च के महीने में ही गर्मी ने अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया था. दिल्ली में मार्च के महीने में ही गर्मी ने पिछले 122 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया था. इस बार की जो गर्मी है वो लोगों को ज्यादा तकलीफ दे रही है क्योंकि पिछले कई सालों की तुलना में इस बार गर्मी जल्दी आई और अभी मई और जून बाकी हैं. देखना होगा की जनता को गर्मी से राहत कब मिलती है? देखें श्वेतपत्र का ये एपिसोड.

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड और आखिर इसकी जरूरत क्यों?

01 मई 2022

uniform civil code: कानून की नजर में सब एक समान होते हैं. जाती से परे, धर्म से परे और इस बात से भी परे कि आप पुरुष हैं या महिला हैं, कानून सबके लिए एक ही है. अब देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानि की समान नागरिकता कानून की मांग उठ रही है. कहने के लिए तो ये बड़ा जटिल सा विषय है लकिन आज हम आपको सरल शब्दों में इसे समझाएंगे. कौन-कौन से राज्य इस कानून को लाने की तैयारी कर रहे है, ये भी आपको बताएंगे. श्वेतपत्र में आज देखिए यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़ी हर जरूरी बात.

बुलडोजर 'क्रांति' से आएगा सुशासन? देखें श्वेतपत्र

23 अप्रैल 2022

बुलडोजर एक ऐसी मशीन है जो बिना सोचे समझे अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को रौंद देती है. एक ऐसी मशीन जिसका इस्तेमाल अतिक्रमण हटाने के लिए किया जाता है लेकिन आज की तारीख में इस मशीन की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है. इस मशीन को कभी किसी मजहब से जोड़ा जाता है तो कभी किसी पार्टी से. इस बुलडोजर वाली राजनीति ने हर तरफ हड़कंप मचाया हुआ है. इस बुलडोजर निति को समझ पाना हर किसीकी समझ से परे है. इस वीडियो में देखें बुलडोजर वाला न्याय.

'सन्यासी की सियासत' से बदला यूपी का इतिहास!

13 मार्च 2022

CM Yogi Adityanath News: योगी आदित्यनाथ को कौन नहीं जानता. पहले जहां ये मठ के वासी थे और एक सन्यासी के रूप में जीवन यापन कर रहे थे आज वही देश के सबसे मुख्य राज्य उत्तर प्रदेश के दूसरी बार मुख्यमंत्री बने है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आज छोटे से बड़ा हर कोई जानता है लेकिन एक वक्त ऐसा था जब इन्हें सिर्फ एक योगी के रूप में ही लोग पहचानते थे. इस वीडियो में देखें कि कैसा रहा योगी आदित्यनाथ का राजनितिक सफर और किस तरह उन्होंने लोगों के दिलों में जगह बनाकर पाई उत्तर प्रदेश की सत्ता की चाबी.

उत्तर प्रदेश की 46 प्रतिशत महिला वोटरों के क्या हैं चुनावी मुद्दे? देखिए श्वेतपत्र

19 फरवरी 2022

UP Assembly Elections 2022: उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल गर्म है. प्रदेश में दो चरण के मतदान हो चुके हैं और अब बारी है तीसरे चरण की. प्रदेश में 46 प्रतिशत मतदाता महिलाऐं हैं जो सरकार बनाने और गिराने के लिए काफी हैं. उत्तर प्रदेश ने ही देश को पहली महिला प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री दी. लेकिन जब बात विधानसभा की आती है तो कभी भी 10 प्रतिशत से ज्यादा महिला सदस्य विधानसभा में नहीं रहे हैं. ऐसे में ये जानना जरुरी है कि आखिर इसके पीछे की वजह क्या है और इतनी बड़ी संख्या में होने के बावजूद सरकारें इनपर ध्यान क्यों नहीं देती. उत्तर प्रदेश में 46 प्रतिशत महिला वोटरों के क्या हैं चुनावी मुद्दे? जानने के लिए देखिये श्वेतपत्र का ये एपिसोड.

देश के सबसे छोटे राज्य पर सबकी नजर, गोवा चुनाव पर क्यों है इतना शोर?

12 फरवरी 2022

विशाल देश के छोटे से राज्य में राज स्थापित करने की चुनावी दौड़ है. पार्टी की सत्ता बचाने निकले हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. 2017 में सरकार बनाने के अरमान दल बदल की धारा में बह गए तो इस बार कांग्रेस पहले से ज्यादा चौकस और चौकन्नी है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी का राजनीतिक खेला कर चुकी ममता बनर्जी ने यहां भी खेल जतलो नारे के साथ बीजेपी के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया है. दिल्ली में तीन बार सरकार बना चुके केजरीवाल भी राजनीतिक विस्तार के इरादे से पणजी के समुद्र तट पर पहुंच गए हैं. गोवा क्षेत्रफल, आबादी, और सीटों को लिहाज से भले छोटा दिखे, लेकिन यहां की राजनीति बड़े बड़े नेताओं को चौंकाने वाली रही है. छोटे राज्य की बड़ी राजनीति के रंग पर देखें श्वेत पत्र.

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और अपराधियों पर देखें श्वेतपत्र

30 जनवरी 2022

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का गांव बम्हौर, जिसकी चर्चा तब हुई जब टी-सीरीज के गुलशन कुमार की हत्या कर दी गई थी और एक ऐसा कट्टा बरामद हुआ था जिसपर मेड इन बम्हौर लिखा हुआ था. आज श्वेतपत्र के इस एपिसोड में हम आपको कानून व्यवस्था के उन हालात में लिए चलेंगे, जहां पर कट्टे से कलाशनिकोव तक का सफर दिखाएंगे. बम्हौर गांव कभी कट्टे के लिए जाना जाता था लेकिन अब यहां परिवर्तन साफ देखा जा सकता है. लेकिन इस बदलाव के बीच यूपी में कानून व्यवस्था, अपराध और अपराधियों के क्या हालात हैं, श्वेतपत्र में हम जानने की कोशिश करेंगे. देखिए.

योगी सरकार को लेकर ब्राह्मण वोटर के मन में क्या है?

23 जनवरी 2022

अपराध का ना तो कोई धर्म होता है ना कोई जाति, लेकिन क्या अपराधी की जाति मतदाताओं के लिए मायने रखती है. उत्तर प्रदेश में विकास दूबे के एनकाउंटर के बाद से ब्राह्मण मतदाता यूपी सरकार से नाराज चल रहा है. ब्राह्मणों के मन में ऐसा भ्रम बन गया है कि सरकार किसी खास जाति के गैंगस्टर को ही टारगेट कर रही है. लेकिन उत्तर प्रदेश की सियासी बाजी जीतने के लिए सभी राजनीतिक दल ब्राह्मण समुदाय को रिझाने पर लगे हैं. पिछली बार बीजेपी (BJP) को एकमुश्त वोट देने वाले ब्राह्मण मतदाता क्या इस बार दूसरे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. आजतक से बातचीत में यूपी के ब्राह्मण वोटरों ने कहा कि विकास को लेकर नाराजगी नहीं हैं लेकिन प्रदेश में कुछ एनकाउंटर ऐसे हुए जो गलत थे. देखें श्वेतपत्र का ये एपिसोड.

UP: सत्ता की साझेदारी में क्या है मुसलमानों की भूमिका? देखे श्वेतपत्र

16 जनवरी 2022

उत्तर प्रदेश में मजहब के नाम पर वोट पड़ना कोई बड़ी बात नहीं है. धर्म के साथ उत्तर प्रदेश चुनाव का पुराना नाता रहा है. पार्टियां धर्म पर सियासत तो करती ही हैं लेकिन चुनाव के वक्त इसी धर्म के नाम पर वोट भी मांगती हैं. मुसलमानो को लेकर राजनीति बहुत होती है इनका साथ देने वाले और इनके दावेदार भी बहुत हैं. श्वेतपत्र में मुसलमान समुदाय से ही जानें कि 2022 के चुनाव में विकास और मजहब के एजेंडा पर क्या है इनकी राय और किसे वोट देने को अग्रसर है ये समुदाय. देखें वीडियो.

श्वेतपत्र: अबकी बार, पहाड़ पर किसकी सरकार? देखें क्या कहती है उत्तराखंड की जनता

02 जनवरी 2022

जितनी कठिन होती है पहाड़ों की जिंदगी. उतनी ही मुश्किल है यहां की राजनीति. अगले साल उत्तराखंड में चुनाव होने वाले हैं और आजतक के खास कार्यक्रम श्वेतपत्र में हम बात कर करे हैं उत्तराखंड की, यहां हुए विकास की और चुनावी रणनीति की. अपने गठन के बाद से ही हर पांच साल पर उत्तराखंड ने एक अलग ही सरकार को चुना है. तो क्या इस बार कामकाज के आधार पर बीजेपी ये दावा कर सकती है कि वो यहां के इतिहास को बदल देगी, या फिर कांग्रेस की चुनौती यहां पर कड़ी है. क्या हैं उत्तराखंड के लोगों के मुद्दे और कहां तक पहुंचा है यहां का विकास? आखिर वोटर के मन में क्या है? देखें श्वेतपत्र का ये एपिसोड.

मुहर लगेगी 'मजहब' पर? धर्म वाले चुनावी दांव पर देखें श्वेतपत्र

26 दिसंबर 2021

चुनावों में धर्म कोई नई बात नहीं है. लेकिन उत्तर प्रदेश के चुनावों में राम के नाम के साथ श्याम का नाम, नई एंट्री जरूर है. इस बार धर्म वाली सियासत में मथुरा नगरी सबसे बड़ा मुद्दा बनती नजर आ रही है. चुनाव का चक्का जब धुरी पर नाचता है तो दिखते हैं केवल दो धर्म- हिंदू और मुस्लिम. जातियों में बंटे हिंदू और मुसलमानों के दम पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी सत्ता में आई. इन्ही दो पार्टियों ने यूपी में कांग्रेस का जनाधार भी घटाया. लेकिन बीजेपी ने साबित कर दिया कि अगर जातीय पहचान छोड़कर हिंदू वोट करें तो हिंदुत्व का एजेंडा ही सरकार बनाने के लिए काफी है. देखिए श्वेतपत्र का ये एपिसोड.

पूर्वांचल साधने में क्यों लगे हैं उत्तर प्रदेश के सियासी दल?

19 दिसंबर 2021

गंगा किनारे बसा समूचा क्षेत्र, एक ऐसा क्षेत्र जहां प्रकृति ने दिल खोलकर अपना प्यार लुटाया लेकिन वहां सालों-साल से विकास की प्रतीक्षा होती रही. क्या अब वहां विकास हुआ है? क्या पूर्वांचल के क्षेत्र में लोगों को नेताओं द्वारा किए गए वादों पर भरोसा होने लगा है? पूर्वांचल उत्तर प्रदेश का एक ऐसा महत्वपूर्ण इलाका है, जहां हर सियासी पार्टा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. जहां डेढ़ महीने में 6 बार प्रधानमंत्री मोदी ने दौरे किए हों, जहां, पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी है, जहां सीएम योगी का गढ़ गोरखपुर भी है. ऐसे में पूर्वांचल के लोगों के मन में चुनाव को लेकर क्या कौतूहल मचा हुआ है, जानने के लिए देखिए श्वेतपत्र का ये एपिसोड.

श्वेतपत्र: विकास के एक्सप्रेसवे पर उत्तर प्रदेश में जनता की क्या है राय?

28 नवंबर 2021

उत्तर प्रदेश के सियासी जमीन पर विकास के सुपर हाईवे कई बनकर तैयार हो गए. अलग-अलग पार्टियां श्रेय लेने के लिए भी तैयार हो गईं. लेकिन, क्या विकास के इन्हीं हाईवे पर यूपी चुनावी अंजाम तय होगा? क्या यूपी की जनता विकास के मुद्दे पर वोट डालने वाली है? अगर हां, तो बीच-बीच में बाकि मुद्दे क्यों उठ रहे हैं? विकास का फैक्टर वहां के लाभ उठाने वाले लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण होता है? यानि जहां हाईवे बनता है, वहां के गांव-देहात में लोग विकास को किस नजरिया से देखते हैं? ये मुद्दे स्थानिय है या पूरे राज्य में असर डालेगा? देखें यूपी चुनाव पर श्वेतपत्र का ये संस्करण.

श्वेतपत्र: कृषि कानून वापसी से क्या रूठे किसान को मना लेगी BJP?

21 नवंबर 2021

पश्चिमी उत्तर प्रदेश बाकी के उत्तर प्रदेश से सांसकृतिक तौर भी अलग नजर आता है और आर्थिक तौर पर भी अलग नजर आता है. मोदी सरकार का सबसे बड़ा निर्णय, यानी तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का फोकस भी पश्चिम उत्तर प्रदेश और यहां के किसान ही है. श्वेत पत्र के इस एपिसोड में हम पश्चिमी यूपी का मन टटोलेंगे और बताएंगे कि यहां का किसान क्या सोच रहा है? तमाम विपक्षी दल और राजनीतिक पंडितों का भी यही कहना है कि विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ही पिछले एक साल से अड़ी सरकार ने कानून वापसी का फैसला केवल इन किसानों की नाराजगी मिटाने के लिए ही किया है. देखिए श्वेत पत्र का ये एपिसोड.

देशभर में बाढ़ और भूस्खलन से क्यों मची है तबाही, जाने कौन है इसका दोषी

31 जुलाई 2021

इस समय हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से लेकर, झारखंड, ओडिशा और बंगाल तक बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने कहर मचाया हुआ है. ज़बरदस्त आर्थिक नुकसान के अलावा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है. हिमाचल के पहाड़ों में विध्वंस मचा रही है तो मैदानों में मानसून की दूसरी पारी कहर बनकर बरसी है. उत्तर भारत और पूर्व के कई राज्यों में सड़कों पर भरे पानी में खिलौनों की तरह डूबी कारें बता रही हैं कि बाढ़ ने शहरों की पूरी व्यवस्था को डुबो दिया है. वहीं देश की राजधानी दिल्ली में भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. देखें वीडियो.

क्या कानून बनाने से रूक जाएगी बढ़ती हुई आबादी? देखें श्वेतपत्र

17 जुलाई 2021

उत्तर प्रदेश में जनसंख्या कानून के लॉन्च होने के बाद इसपर चर्चा और तेज हो गई. कई अन्य राज्यों में भी इस कानून को लागू करने की बात चल रही है. इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि जनसंख्या के मुताबिक देश में संसाधनों की कमी है. इस बीच इसपर सियासत भी शुरू हो गई है, विपक्षी पार्टियां इसे बीजेपी का चुनावी हथियार बता रही है. उनका कहना कि देश में शिक्षा का स्तर बढ़ाने पर जनसंख्या अपने आप रूक जाएगी. साथ ही विपक्षी दलों ने ये भी आरोप लगाया कि एक समुदाय विशेष को परेशान करने के लिए बीजेपी ऐसा कानून ला रही है देखें वीडियो.