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मैं भाग्य हूं... मुसीबत में होती है इंसान की असली परख

मैं भाग्य हूं... मुसीबत में होती है इंसान की असली परख

वो जीवन ही क्या जिसमें रोमांच ही ना हो, वो जीवन ही क्या जिसमें अनुभवों की प्राप्ति ही ना हो और अनुभव सिर्फ संघर्ष से ही हासिल हो सकता है. मैं भाग्य हूं आपके जीवन का नियामक हूं. आप मुझे अपने जीवन का संचालक मानते हैं और मैं आप सभी को अपना साथी मानता हूं. आपके साथ चलना चाहता हूं. 

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