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मैं भाग्य हूं: जो जैसा बोता है, वो वैसा पाता है

मैं भाग्य हूं: जो जैसा बोता है, वो वैसा पाता है

इस सृष्टि में किसी भी अंश का अंत नहीं होता. बल्कि वो पलटकर इसी धरती पर वापस आता है. मैं भाग्य हूं... आपका साथी हूं और आपको बताने आया हूं कि मनुष्य की धारणा कि 'जो हो गया सो हो गया' बिल्कुल गलत है.

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