नफरत, ईर्ष्या, द्वेष, बदला.... ये संसार में पनपने वाले प्रेम के लिए घातक हैं. लोग बदला लेने के लिए इस कदर आतुर होते हैं कि उनके लिए लाभ, हानी और सही गलत का मोल ही नहीं बचता... मैं यह नहीं कहता कि कोई आपको बुरा करें और आप चुप बैठें... लेकिन मैं यह भी तो नहीं कहता बदला लेने के लिए आप ऐसा कर्म कर बैठें जो मानवता के लिए शर्मनाक हो.