क्या अगड़े-पिछड़े में बंटेंगे कॉलेज कैंपस? UGC ने देश के सभी कॉलेजों में 13 जनवरी को इक्विटी यानी बराबरी की कमेटियां बनाने का नियम लागू किया है. इन नियमों का उद्देश्य तो कॉलेज में जातिगत भेदभाव रोकना है, लेकिन सोशल मीडिया में इस पर ये कहकर तूफान उठा है कि ये अगड़ों यानी सवर्ण जातियों के साथ अन्याय करने वाले नियम हैं, क्योंकि इक्विटी कमेटियों में सवर्णों का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा. सोशल मीडिया पर चल रहे कैंपेन के बाद बीजेपी के कुछ नेता ये भरोसा देने की कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार सवर्णों से भेदभाव का कोई कदम नहीं उठाएगी. लेकिन, इस पर हंगामा बढ़ता जा रहा है. सवाल उठ रहा है कि क्या वोट बैंक के लिए सवर्ण 'बलि का बकरा' बनाए जा रहे हैं ? और जब संविधान में समानता है तो फिर कैंपस को क्यों बांट रहे? लेकिन हल्ला बोल की बहस शुरू करूं, उससे पहले ये रिपोर्ट.