इंसाफ के रास्ते में राजनीति आ जाए तो क्या होता है. वही होता है जो अफजल गुरू, बलवंत सिंह राजोआना और देवेंदरपाल सिंह भुल्लर जैसे इंसानियत के दुश्मनों के साथ हो रहा है. आतंकवाद और देशद्रोह पर बड़ी बड़ी बातें करने वाले रातों-रात बदल जाते हैं और गुनहगार की गर्दन फांसी से बचती रहती है. वो चाहे बीजेपी हो, शिवसेना हो , डीएमके या खुद कांग्रेस. आज के हल्लाबोल में हम बहस करेंगे कि क्या राजनीति न्याय और नैतिकता की गर्दन रेते बगैर बड़ी नहीं हो सकती?