scorecardresearch
 
Advertisement

दस्तक: हर 'जिंदगी' को धुएं में उड़ाता चला गया !

दस्तक: हर 'जिंदगी' को धुएं में उड़ाता चला गया !

दो दिन से बहुत चर्चा हुई है प्रदूषण की. दिल्ली की हवा जहरीली हो चुकी है. इसे ठीक करने की कोई तैयारी भी नहीं है. तो क्या ये सवाल पैसे का है. क्या से सवाल तकनीक का है।. या क्या किसी मजबूरी का है. नहीं. नीयत पर वाल उठे हैं. आजादी के बाद हमने विकास के जो पैमाने बनाए उसने आदमी की जिंदगी को देखा ही नहीं. हमेशा उसकी जरूरतों को देखा. नतीजा हम अंधकार युग को अपना मुकद्दर मान बैठे. देखें वीडियो

Advertisement
Advertisement