प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर से बिना नाम लिए याद दिलाया कि जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी उन्हें रोका गया. 1951 में मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में राष्ट्रपति के शामिल होने पर आपत्ति जताई गई. यह वही दौर था जब आस्था को सत्ता की सीमाओं में बांधने की कोशिश हुई. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के मौके पर पीएम मोदी का संबोधन सिर्फ अतीत की कथा नहीं, यह भविष्य का घोष है. देखें दंगल.