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शरीर को जो वाकई चाहिए, वह आराम है, नींद नहीं

अगर आपके पास ऐसा शरीर है जिसे 12 घंटे काम करने के बाद 12 घंटे सोना पड़े, तो वह एक कुशल सिस्टम नहीं है - इसका मतलब है कि उसे ठीक से संभाला नहीं जा रहा है.

सद्गगुरु के विचार सद्गगुरु के विचार

नींद शरीर की मरम्मत का समय होता है. मान लीजिए आपके पास एक कार है जो आपने 15 दिन इस्तेमाल की, और फिर उसे गराज में 15 दिन के लिए मरम्मत के लिए देना पड़े - तो कोई पब्लिक ट्रान्सपोर्ट लेना बेहतर होगा! अगर आपके पास ऐसा शरीर है जिसे 12 घंटे काम करने के बाद 12 घंटे सोना पड़े, तो वह एक कुशल सिस्टम नहीं है - इसका मतलब है कि उसे ठीक से संभाला नहीं जा रहा है. शायद उसमें डाला जाने वाला ईंधन अच्छा नहीं है, या शायद आपका इंजन लीक कर रहा है. 

हो सकता है कि मेडिकल दृष्टि से आपको फिट घोषित कर दिया गया है, लेकिन फिर भी, अगर आपको 8 से 10 घंटे सोना पड़ता है - जिसे दुर्भाग्य से योग्यता प्राप्त लोग स्टैंडर्ड बता रहे हैं - यह एक मानव मशीन की भयंकर रूप से अक्षम समझ है. यह मानव प्रणाली धरती की सबसे परिष्कृत मशीन है. लेकिन अगर इसे ऐसा बना दिया जाए कि इसे आधे समय मरम्मत की जरूरत पड़े, तो आप इसे सबसे परिष्कृत मशीन नहीं कह सकते. 

आप अपनी नींद के कोटे को नाटकीय रूप से कम करने के लिए कुछ आसान चीजें कर सकते हैं. 

1. ताजा खाएं

पहली चीज है कि ताजा भोजन करें. योग परंपरा में, एक सरल समझ यह है कि अगर आप कुछ पकाते हैं, तो उसे आपको देर से देर नब्बे मिनट के भीतर खा लेना चाहिए. उसके बाद, भोजन में जड़ता आने लगेगी. अगर आप अधिक जड़ता वाला भोजन खाते हैं, तो शरीर आलसी बन जाता है. इसे देर तक नींद लेने की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि शरीर को उस जड़ता को काटने के लिए बहुत ज्यादा ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है. इसका मतलब है कि आपका शरीर अपनी मरम्मत के लिए ज्यादा समय लेता है, क्योंकि आप उसमें निम्न-श्रेणी का ईंधन डाल रहे हैं. 

2. प्राकृतिक भोजन खाएं

इंसान की प्रकृति ऐसी है कि वे जैसी चाहें वैसी परिस्थितियां बना सकते हैं, जबकि हर दूसरा जीव जिस परिस्थिति में रखा जाता है उसी के अनुरूप खुद को ढाल लेता है. यही चीज हमें अलग बनाती हैं. अगर आपको अपनी किसी भी तरह की परवाह है, तो आपको इस बारे में जागरूक होना होगा कि आपके सिस्टम के अंदर क्या जाता है. 

लेकिन आज की दुनिया में, अच्छी गुणवत्ता का भोजन खाना ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि आपको जो भोजन मिलता है वह ज्यादातर व्यापारिक ताकतों से तय हो रहा है, जो वाकई शरीर का ईंधन नहीं है. अगर उसमें बहुत ज्यादा केमिकल्स और सिंथेटिक चीजें हैं, तो शरीर उसे हजम करने के लिए नहीं बना है. अगर आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन का एक प्रतिशत भी सिंथेटिक प्रकृति का है, चाहे वह उर्वरक के रूप में हो, या केमिकल या प्रेज़र्वेटिव के रूप में हो, तो पूरी पाचन प्रणाली एक संघर्ष बन जाती है. चूंकि शरीर संघर्षरत है, तो वह स्वाभाविक रूप से आपको सोने को प्रेरित करता है, इसलिए आपकी नींद का कोटा काफी बढ़ जाता है. 

3. कितना खाएं

आप अपनी ऊर्जाएं कितनी कुशलता से संभालते हैं, यही आपकी सतर्कता को तय करता है. ध्यान करने के लिए, सतर्कता सिर्फ मन की ही नहीं होनी चाहिए, बल्कि आपकी ऊर्जा की भी होनी चाहिए. इसकी मदद के लिए, योग के मार्ग पर चलने वाले लोगों के लिए कहा जाता है कि आपको सिर्फ 24 निवाले खाने चाहिए, और हर निवाले को आपको कम से कम 24 बार चबाना चाहिए. यह सुनिश्चित करेगा कि अंदर जाने से पहले, भोजन आपके मुंह में ही आधा पच जाता है और वह सुस्ती नहीं पैदा करेगा. 

अगर आप ऐसा अपने रात के भोजन के दौरान करते हैं, तो आप आसानी से सुबह 3:30 पर जाग जाएंगे. योग पद्धति में इस समय को ब्रह्म-मुहूर्त कहते हैं. योग अभ्यास करने का यह आदर्श समय है क्योंकि उस दौरान आपकी साधना के लिए प्रकृति से अतिरिक्त सहारा उपलब्ध होता है. 

4. खाना खाने के बाद तुरंत मत सोएं

बहुत से लोग ऐसी मानसिक अवस्था में हैं जो जब तक खुद को भोजन से लाद नहीं देते और शरीर को सुस्त नहीं बना देते, वे सो नहीं सकते. अगर आपकी ऐसी दशा है, तो आपको इस मुद्दे को संभालना होगा. यह सोने के बारे में नहीं है; यह एक मानसिक अवस्था है.  

मैं तो कहूंगा कि आपके खाए हुए खाने का 80 प्रतिशत बरबाद चला जाएगा अगर आप खाना खाने के दो घंटे के अंदर सो जाते हैं. सोने से पहले पाचन होने के लिए आपको पर्याप्त समय देना चाहिए. 

5. खुद को नींद से जबरदस्ती वंचित मत करें

आपके शरीर को कितनी नींद की जरूरत है, यह आपकी शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करता है. भोजन या नींद की मात्रा को निर्धारित करने की जरूरत नहीं है. जब आपकी गतिविधियों का स्तर कम हो तो आप कम खाएं. जब वह ज्यादा हो, तो आप ज्यादा खा सकते हैं. यही नींद पर भी लागू होता है. जिस पल शरीर को पर्याप्त आराम मिल जाता है, वह जाग जाएगा, चाहे वह सुबह का 3 बजा हो या 8 बजा हो. आपको शरीर को अलार्म की घंटी से नहीं जगाना चाहिए. जब वह पर्याप्त आराम महसूस कर लेता है तो उसे जाग जाना चाहिए. 

अगर आप शरीर को जबरदस्ती नींद से वंचित रखते हैं, तो आपकी शारीरिक, मानसिक और बाकी क्षमताएं मंद पड़ जाएंगी. आपको वैसा कभी नहीं करना चाहिए. आपके शरीर को जितनी नींद की जरूरत हो, आपको उसे देनी चाहिए. 

लेकिन अगर शरीर बिस्तर को कब्र की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है, तो वह उठना नहीं चाहेगा. किसी को आपको मुर्दे की अवस्था से उठाना होगा! यह इस पर निर्भर करता है कि आप अपने जीवन को कैसे संभाल रहे हैं. अगर आप ऐसी मानसिक दशा में हैं जहां आप जीवन से बचना चाह रहे हैं, तो आप स्वाभाविक रूप से ज्यादा खाना और सोना चाहते हैं. 

6. योग अभ्यास - शांभवी महा मुद्रा

अगर आप अपने जीवन में शांभवी महा मुद्रा जैसे कुछ योग अभ्यासों को ले आते हैं, तो पहला बदलाव जो आप देखेंगे वह आपकी पल्स-रेट में होगा. 12 से 18 महीने के अभ्यास में, आप अपनी पल्स-रेट को, आराम की स्थिति में, नीचे लगभग 50 या 60 तक ला सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो आपकी नींद का कोटा नाटकीय ढंग से कम हो जाएगा क्योंकि शरीर दिन भर आमतौर पर आराम में है. आप चाहे जो भी गतिविधियां कर रहे हों, वह आराम में रहता है. तो यह अधिक नींद की मांग नहीं करेगा. 

(एक योगी और दिव्यदर्शी सद्गुरु, एक आधुनिक गुरु हैं. विश्व शांति और खुशहाली की दिशा में निरंतर काम कर रहे सद्गुरु के रूपांतरणकारी कार्यक्रमों से दुनिया के करोड़ों लोगों को एक नई दिशा मिली है. 2017 में भारत सरकार ने सद्गुरु को उनके अनूठे और विशिष्ट कार्यों के लिए पद्मविभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया है.) 

 

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