राहुल गांधी अमेरिका में आजकल लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जो किसी न किसी तरह से भारत के खिलाफ जा रहा है. हालांकि उनके निशाने पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस हैं. पर राहुल गांधी विरोध की राजनीति में इस कदर डूब जा रहे हैं कि उनके स्टेटमेंट भारत विरोधी हो जा रहे हैं. आरक्षण पर बात करते हुए उन्होंने कहा था भारत में आरक्षण तब खत्म कर दिया जाएगा जब भारत एक फेयर प्लेस हो जाएगा. राहुल गांधी की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि भारत उनको क्यों फेयर प्लेस नहीं नजर आता है. राहुल अपनी यात्रा के दौरान चीन की तारीफ करते हैं. चीन कितना फेयर प्लेस इस पर तर्क देने की जरूरत नहीं है. हां राहुल गांधी जिस जमीन पर (अमेरिका) भारत को फेयर प्लेस नहीं होने की बात कर रहे हैं वहां आम लोगों के साथ फेयर हो रहा है आइये हम बताते हैं.
1- अमेरिका में अश्वेतों पर होने वाले अत्याचार की घटनाएं
अफ्रीकी-अमेरिकियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा के आंकड़ें बताते हैं कि अमेरिका में ब्लैक्स पर कितना अत्याचार हो रहा है. Mapping Police Violence के अनुसार, 2013 से 2022 तक, अमेरिका में पुलिस के हाथों मारे गए कुल लोगों में से 25% अफ्रीकी-अमेरिकी थे, जबकि अमेरिका में इस समुदाय की आबादी केवल 13 परसेंट ही ही. 2020 में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नस्लीय अन्याय और पुलिस हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई. यह आंदोलन नस्लीय असमानताओं और पुलिस के हाथों ब्लैक लोगों के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों को उजागर करने का प्रतीक बन गया. 2013 से 2022 के बीच अमेरिका में पुलिस की गोली से मारे गए 8000 से अधिक लोगों में 1 978 अफ्रीकी-अमेरिकी थे. यानि कि पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने वाले लोगों में श्वेत अमेरिकियों के मुकाबले काले लोगों की संख्या तीन गुना अधिक थी.
2-अमेरिकी लोकतंत्र में नस्लवाद, भारत के जातिवाद से अधिक
अमेरिका में श्वेत और अश्वेत लोगों के विकास की रफ्तार देखकर पता चलता है कि किस तरह वहां ब्लैक्स लोगों के साथ सौतेला व्यवहार होता है. National Center for Education Statistics के अनुसार 2021 में, श्वेत अमेरिकियों में से 41% ने कॉलेज डिग्री प्राप्त की थी, जबकि अफ्रीकी-अमेरिकियों में यह दर केवल 28% थी. Bureau of Labor Statistics के अनुसार, अफ्रीकी अमेरिकियों की बेरोजगारी दर श्वेत अमेरिकियों की तुलना में करीब 6 परसेंट ज्यादा थी.COVID-19 महामारी ने इन असमानताओं को और अधिक उजागर किया. कोविड के दौरान अफ्रीकी-अमेरिकियों की मृत्यु दर श्वेत अमेरिकियों की तुलना में लगभग 2.6 गुना अधिक थी.
3- अमेरिकी समाज पर पूंजीवाद, लॉबी हावी, जो जनहित के कानून नहीं बनने देते
अमेरिकी लोकतंत्र देश के कुछ गिने-चुने लोगों के हाथों में केंद्रित है. वे राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. लॉबिंग, चुनावी फंडिंग, और बड़े राजनीतिक दान के माध्यम से, कॉर्पोरेट्स और अमीर व्यक्ति सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रियाओं पर गहरा प्रभाव डालते हैं. इसका परिणाम यह है कि सरकारी नीतियां और कानून उन लोगों के हित में बनने लगते हैं जिनके पास सबसे अधिक आर्थिक शक्ति है. यही कारण है हर साल स्कूलों में गोली बारी के चलते सैकड़ों बच्चे मारे जाते हैं पर हथियारों पर प्रतिबंध नहीं लग पाता है. कारण यही है कि हथियारों की लॉबी इतनी तगड़ी है कि अपने खिलाफ कानून ही नहीं बनने देती है.
4-अच्छा है कि अमेरिका के गन कल्चर का भारत से कोई मुकाबला नहीं
अमेरिका जिस तरह का गन कल्चर है उसके चलते वहां लोकतंत्र की क्या स्थित होगी यह आसानी से समझा जा सकता है. अमेरिका में 2023 के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 400 मिलियन से अधिक बंदूकें नागरिकों के पास हैं, जो देश की आबादी से भी अधिक है. यह हथियारों की उपलब्धता घरेलू हिंसा, अपराध, और खासकर सामूहिक गोलीबारी की घटनाओं को बढ़ावा देती है. FBI और अन्य सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका में हर साल हजारों लोग बंदूक हिंसा का शिकार होते हैं. 2020 में, लगभग 45,000 से अधिक लोग बंदूक से संबंधित घटनाओं में मारे गए थे, जिसमें आत्महत्याएं और हत्याएं शामिल हैं.
भारत में, हालांकि बंदूकें कानूनी रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन यह प्रक्रिया बहुत सख्त और नियंत्रित है. बंदूक लाइसेंस प्राप्त करना कठिन है और अधिकांश नागरिकों के पास हथियार नहीं होते. यही कारण है कि भारत में बंदूक से होने वाली हिंसा की घटनाएं कम हैं.
5-अमेरिका में अपराध भारत की तुलना में कई गुना अधिक
अमेरिका में अपराध की दर भारत से कई गुना अधिक है. राहुल गांधी किस आधार पर भारत को अनफेयर प्लेस बता रहे हैं . एक बार ये आंकड़े जरूर देख सकते हैं. एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में प्रति एक लाख लोगों पर लगभग 2,900 अपराध दर्ज किए जाते हैं जबकि भारत में प्रति एक लाख लोगों पर लगभग 385 मामले दर्ज किए जाते हैं .जबकि भारत की जनसंख्या अमेरिका से लगभग चार गुना ज्यादा है. यानि कि कानून व्यवस्था संभालना भारत में अमेरिका के मुकाबले और कठिन है. 2021 में अमेरिका में प्रति एक लाख लोगों पर 6.5 हत्याएं दर्ज की गईं जबकि भारत में इतने ही लोगों पर 2.6 हत्याएं दर्ज की गईं.यही हाल रेप और महिला उत्पीड़न का है.
6-अमेरिका में अमीर-गरीब खाई देखकर रोना आ जाएगा
अमेरिका के एक फेमस सीनेटर हैं बर्नी सैंडर्स उनका कहना है कि उनके देश में एक करोड़ 20 लाख बुजुर्गों को भरपेट भोजन नहीं मिल रहा है.अगर आबादी की लिहाज से भारत से तुलना करें तो कम से कम 5 करोड़ लोगों को एक टाइम का भोजन नहीं मिल रहा है. सीनेट में एक कमेटी की रिपोर्ट पेश करते हुए वो बताते हैं कि देश में करीब 25 परसेंट बुजु्र्ग सामाजिक रूप से अकेलापन भोग रहे हैं. अमेरिका में अमीर गरीब की खाई किस तरह से बढ़ रही है, राहुल गांधी को इन आंकड़ों पर गौर करना चाहिए .
अमेरिका में शीर्ष 1% लोगों की औसत आय 2020 में लगभग $1.7 मिलियन प्रति वर्ष थी, जबकि निचले 90% की औसत आय लगभग $40,000 थी. यह साफ तौर पर दिखाता है कि शीर्ष 1% और बाकी आबादी के बीच आय में बहुत बड़ा अंतर है. इसी तरह शीर्ष 1% लोगों के पास अमेरिका की कुल संपत्ति का लगभग 38% है, जबकि निचले 50% लोगों के पास केवल 2% संपत्ति है.
भारत कितना भी बुरा हो, यहां टेरर फंडिंग का आरोपी इंजीनियर राशिद चुनाव लड़ सकता है, सांसद बन सकता है
भारत में टेरर फंडिंग का आरोपी इंजिनियर ऱाशिद भी चुनाव लड़ सकता है. खालिस्तान का खुलेआम समर्थन करने वाले भी चुनाव जीतकर संसद में पहुंच सकते है. संसद पर हमले के दोषी को बचाने के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करता है. क्या अब भी राहुल गांधी भारत को अनफेयर प्लेस कहेंगे? क्या अमेरिका में ऐसा संभव है.
इन आंकड़ों को एक बार देखने और पढ़ने के बाद भारत और अमेरिका की तुलना करिएगा कि दोनों देशों में फेयर प्लेस कौन सा देश है?