जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का वक्त नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे गुजरात में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ती दिखरही हैं. हालांकि बीजेपी के सामने मुकाबले में विपक्ष बिखरा हुआ दिख रहा है. राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद गुजरात में पूरी तरह से राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है. सप्ताह की शुरुआत में ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुजरात का एकदिवसीय दौरा किया, जिसमें उन्होंने एक साथ सभी 26 लोकसभा सीटों के लिए मध्यस्थ कार्यालय खोले. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसदीय क्षेत्र मे उन्होंने कार्यालय का ओपनिंग किया और वहीं से बाकी 25 जगह पर वर्चुअल माध्यम से कार्यालय खोले गए.
गुजरात ऐसा पहला राज्य है जहां सभी लोकसभा सीटों के लिए भाजपा के कार्यालय शुरू हो चुके हैं. आम तौर पर भाजपा उम्मीदवार घोषित होने के बाद ऐसे कार्यालय खोलती है, पर इस बार राष्ट्रीय रणनीति के तहत सभी राज्य इकाइयों को सूचना दी गई थी कि 30 जनवरी से पहले लोकसभा कार्यालय खोले जाएं, जिसमें आगे रहते हुए गुजरात भाजपा ने एक साथ सभी 26 लोकसभा कार्यालय खोल दिए.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस काम के लिए पार्टी की प्रदेश इकाई को सराहा और साथ ही कहा कि गुजरात हमेशा से आगे रहा है. गुजरात से भाजपा आगे बढ़ी है और अब देश आगे बढ़ रहा है. उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को विश्वास दिलाया कि इस बार भाजपा पूरे देश में रिकॉर्ड सीटों के साथ फिर एक बार मोदी सरकार बनाने जा रही है और गुजरात फिर एक बार भाजपा को सभी 26 सीटें देगा. इस कार्यक्रम के दूसरे दिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने सभी सांसदों, विधायकों और चुनाव प्रभारीयों की महत्वपूर्ण बैठक ली, जिसमें उनको लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए मार्गदर्शन दिया गया.
सभी चुने हुए प्रतिनिधियों को कहा गया कि उनके मत क्षेत्र के जितने भी बूथ माइनस रहे हैं, वहां पर ज्यादा मेहनत करके उसको जीता जाए. अपने-अपने मत क्षेत्रों में एक भी बूथ माइनस ना रहे, उसकी चिंता सभी चुने हुए जन प्रतिनिधि करें. लोकसभा चुनाव में हर सीट पर 5 लाख की लीड लाने के लिए हारे हुए सभी बूथ जीतना बेहद जरूरी है. साथ ही ऐसे सभी मजबूत विपक्षी नेताओं, सरपंचों को पार्टी में जोड़ा जाए ताकि लोकसभा में 5 लाख की लीड का लक्ष्य आसानी से पूरा हो सके.
इसके बाद ही निर्दलीय विधायक धर्मेंद्र सिंह वाघेलाने ने इस्तीफा दिया और भाजपा में जुड़ने का ऐलान किया. यह अब तक का चौथा इस्तीफा था, जहां पर जीते हुए विधायक ने एक साल के भीतर अपना विधायक पद छोड़ा और भाजपा में शामिल होने के लिए तैयारी दिखाई. वैसे तो विधानसभा चुनाव में 156 सीटें जीतकर भाजपा ने रिकॉर्ड बनाया था. फिर भी विपक्ष के विधायकों को भाजपा में शामिल करने की कवायद चल रही है ताकि यह आंकड़ा और बड़ा किया जा सके. इसके पीछे बीजेपी की रणनीति यह है कि आने वाले राज्यसभा चुनाव में विपक्ष से कोई भी उम्मीदवार खड़ा ना हो पाए.
वहीं दूसरी ओर गुजरात कांग्रेस अपने विधायकों को बचाने में लगी हुई है. राम मंदिर पर हाई कमान के फैसले के खिलाफ किए ट्वीट के बाद अटकलें चल रही हैं कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और पोरबंदर के विधायक अर्जुन मोढवाडिया किसी भी वक्त इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम सकते हैं. हालांकि, मोढवाडिया ने ट्वीट करके कहा कि वह अभी कांग्रेस में हैं. इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी और वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक गुजरात आए, जहां पर उन्होंने प्रदेश चुनाव समिति की बैठक बुलाई और केंद्रीय स्क्रीनिंग कमेटी के भी तीन सदस्य मौजूद रहे.
इस बैठक में लोकसभा चुनाव में गठबंधन से लेकर उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया पर चर्चा हुई. बैठक के बाद मुकुल वासनिक ने अर्जुन मोढवाडिया से भी अलग से बात की और उनको समझाया. उनकी नाराजगी के जितने भी मुद्दे थे उसे पर भी चर्चा की. ऐसा सूत्रों का दावा है. यह बैठक कितनी सफल रही यह तो आने वाले दिनों में पता चलेगा, पर 1 फरवरी से शुरू हो रहे गुजरात विधानसभा के बजट सत्र के पहले विपक्षी खेमे में खलबली है. वहीं भाजपा पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतर चुकी है.
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल बार बार यह बचाव कर रहे हैं कि उनकी पार्टी में लोकशाही है, जिसकी वजह से विधायक हों या नेता अपनी बात सार्वजनिक मंच पर रखते हैं. उसका यह मतलब नहीं है कि वह पार्टी छोड़ रहे हैं या पार्टी के सामने बगावत कर रहे हैं. फिलहाल कांग्रेस के सामने लोकसभा चुनाव से पहले सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने बाकी 15 विधायकों को एकजुट रख पाए और राहुल गांधी की न्याय यात्रा का गुजरात में सफल आयोजन कर पाए. गुजरात की भरूच लोकसभा सीट को लेकर भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच लड़ाई चल रही है.
एक ओर जेल में बंद आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा को जमानत मिलने के बावजूद वह बाहर नहीं आए और उनके चुनाव लड़ने की घोषणा खुद अरविंद केजरीवाल ने कर दी. वहीं कांग्रेस की ओर से दिग्गज नेता रहे अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल और बेटी मुमताज पटेल भरूच के गांवों में घूम.घूम कर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. आने वाले दिनों में यह लड़ाई और दिलचस्प होती हुई दिख रही है.क्योंकि वहां पर भाजपा के 6 टर्म से सांसद मनसुख वसावा इस बार रिपीट ना हो ऐसी अटकलें चल रही हैं. देखना यह होगा कि भाजपा उनको फिर से टिकट देगी या नहीं.