महाराष्ट्र की राजनीति का एक ऐसा 'पावर स्टेशन' आज बुधवार को शांत हो गया, जिसकी धड़कनें घड़ी की सुइयों के साथ चलती थीं. अजित पवार, जिन्हें पूरा महाराष्ट्र 'दादा' के नाम से पुकारता था, केवल एक राजनेता नहीं थे. वे अनुशासन, काम करने के जुनून और एक अनप्रेडिक्टेबल व्यक्तित्व का अनूठा मेल थे. उनके करीब रहे पत्रकारों और सहयोगियों के स्मृतियों से उनके जीवन की जो तस्वीर उभरती है, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है.
वरिष्ठ पत्रकार रित्विक भालेकर 23 नवंबर 2019 की सुबह को आज भी नहीं भूल पाए हैं, जब अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. महाराष्ट्र ही नहीं, पूरा देश हैरान था. रित्विक भालेकर के लिए यह सिर्फ एक बड़ी राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव था, जिसने उन्हें अजित पवार के व्यक्तित्व के सबसे सख्त और सबसे मानवीय दोनों पहलुओं से रू-बरू कराया.
राजभवन की वो अनिश्चितता
रित्विक बताते हैं कि शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों बाद राजभवन में मौजूद तमाम पत्रकारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि अजित पवार आखिर गए कहां? कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी. तभी एक व्यक्ति बाइक से वहां पहुंचा और बताया कि अजित पवार मलबार हिल में अपने भाई के आवास पर हैं. इस सूचना के बाद रित्विक और उनकी टीम वहां पहुंची.
ऊपर फ्लैट में सन्नाटा था, लेकिन नीचे एक छोटे होटल में 40 लोगों के खाने का ऑर्डर दिया गया था. यहीं से यह लगभग तय हो गया कि कुछ विधायक यहीं मौजूद हैं. कुछ देर बाद अजित पवार की गाड़ी नीचे दिखाई दी. जब उनके कार्यकर्ता और पदाधिकारी फूलों का गुलदस्ता लेकर लिफ्ट से ऊपर जा रहे थे, तो रित्विक भी उनके साथ लिफ्ट में दाखिल हो गए.
ऊपर पहुंचने पर जो दृश्य दिखा, वह सत्ता की उठा-पटक से बिल्कुल अलग था. अजित पवार अपने भाई और परिवार के साथ भोजन कर रहे थे. लेकिन जैसे ही उनकी नजर रित्विक पर पड़ी, उनका सख्त और अनुशासित चेहरा सामने आ गया. पहला सवाल था, “तुम अंदर घुसे कैसे?”
रित्विक कहते हैं कि उन्हें पता था कि अजित पवार बेहद सख्त स्वभाव के हैं. उन्होंने शांत स्वर में बस इतना कहा, “दादा, आपने शपथ ले ली है, उसके विजुअल्स आ चुके हैं. आगे क्या होगा, इस पर आपकी प्रतिक्रिया चाहिए थी.”
यह सुनते ही अजित पवार भड़क गए. उन्होंने साफ कहा कि वे अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे. मैं अपने परिवार के साथ हूं, बाद में मीडिया से बात करूंगा. यह कहते हुए उन्होंने बातचीत वहीं खत्म कर दी.
रित्विक नीचे लौट आए और वही पहली प्रतिक्रिया न्यूज में चली. रित्विक मानते हैं कि यह घटना अजित पवार के व्यक्तित्व को पूरी तरह बयां करती है. वे कब क्या करेंगे, यह कोई नहीं जान सकता था. वह पूरी तरह अनप्रेडिक्टेबल नेता थे.
राजनीति से इस्तीफा… और अचानक फैसले
रित्विक के मुताबिक, अजित पवार का यही स्वभाव राजनीति में भी दिखता रहा. कभी अचानक उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, कभी राजनीति से संन्यास की बात. वे फैसले लेते वक्त किसी को संकेत नहीं देते थे. रित्विक कहते हैं, “जिस तरह उन्होंने राजनीति से अचानक दूरी बनाने की बात की थी, मुझे लगता है उसी तरह उन्होंने इस दुनिया से भी अचानक सबको चौंका दिया.”
लेकिन इस सख्त और अप्रत्याशित छवि के पीछे एक बेहद संवेदनशील इंसान भी था. रित्विक बताते हैं कि काम को लेकर अजित पवार कभी पीछे नहीं हटते थे. चाहे पार्टी का कार्यकर्ता हो या विपक्ष का नेता, अगर काम जायज है, तो वे पूरी ताकत से उसे पूरा कराने की कोशिश करते थे.
उनके मुताबिक, अजित पवार दिल से उतने ही नरम थे, जितना बाहर से सख्त दिखते थे. लोगों की मदद करना, काम को अंजाम तक पहुंचाना, यह उनके लिए राजनीति से ज्यादा व्यक्तिगत जिम्मेदारी थी.
रित्विक भालेकर कहते हैं कि अजित पवार जैसे नेता कम ही होते हैं, जो एक साथ डर भी पैदा करते हैं और भरोसा भी. उनका जाना सिर्फ एक राजनीतिक शख्सियत का अंत नहीं, बल्कि उस दौर का अंत है, जहां फैसले अचानक होते थे, लेकिन जमीन पर असर साफ दिखाई देता था.