दूषित पानी से इंदौर में हुई मौतों के बाद अब उज्जैन का नगर पालिका निगम भी जाग गया है. नगर निगम द्वारा शहर में मुनादी करवाई जा रही है कि नलों से आने वाले पानी को सीधे उपयोग में न लिया जाए, खासकर पेयजल के लिए. आवश्यक होने पर पानी को उबालकर या फिर छानकर प्रयोग में लें.
मुनादी में ये भी अनाउंस किया जा रहा है कि पेयजल की व्यवस्था निगम द्वारा अलग से की जा रही है. अब इस बात से तो लगता है कि उज्जैन में दूषित पानी का खतरा मंडरा रहा है. मुनादी की शुरूआत पर गौर किया जाए, तो नगर निगम खुद मान रहा है कि शहर के कुछ इलाकों में पानी के दूषित होने की संभावना पाई गई है.
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शासन के आदेश के बाद अलर्ट पर है निगम की टीम
इस मामले में निगम कमिश्नर का कहना है कि शासन से आए निर्देश के बाद पूरी टीम अलर्ट पर है. टंकियों की नियमित साफ सफाई की जा रही है. साथ ही ये सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि जल आपूर्ति प्लांट पर केमिकल की कमी न हो. नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा का कहना है कि जन जागरण के लिए भी कहा गया है, ताकि लोग अपने खुले नल कनेक्शनों का उपयोग करने के बाद उसे बंद करें.
उनका कहना था कि चौड़ीकरण के मार्ग और जहां जहां समस्याएं हैं, वहां लोगों को कहा जा रहा है कि वे पानी का उपयोग उबालने के बाद ही करें. साथ ही ऐसे क्षेत्रों में पानी साफ करने के लिए दवा का भी वितरण किया जा रहा है, ताकि किसी तरह की समस्या न हो. निगम द्वारा इस बात का प्रयास भी किया जा रहा है कि गंदे पानी कि शिकायत मिलते ही उसका 24 से 48 घंटों में निदान किया जाए.