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बच्चे के गले में 3 दिन से अटका 5 रुपए का सिक्का, डॉक्टरों के पास भटकते रहे परिजन, सरकारी अस्पताल में निकला

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद में रहने वाले परिवार ने अपने बच्चे की आहार नली में फंसे सिक्के को निकलवाने के लिए तमाम क्लीनिक और अस्पतालों की खाक छानी, लेकिन पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के सतना स्थित सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों ने एक तरकीब अपनाकर फंसे हुए सिक्के को निकाल दिया.

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डॉक्टर संजीव प्रजापति ने बच्चे के गले से निकाला सिक्का. डॉक्टर संजीव प्रजापति ने बच्चे के गले से निकाला सिक्का.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 4 साल के मासूम की आहार नली में फंस गया था 5 रुपए का सिक्का
  • 3 दिन से मासूम को खाने और पीने में हो रही थी दिक्कत

उत्तर प्रदेश के कर्वी (चित्रकूट) निवासी आनंद किशोर चौधरी के 4 वर्षीय बालक की आहार नली में 5 रुपए का सिक्का फंस गया तो घर वाले बेहद परेशान हो गए. 3 दिनों तक डॉक्टरों के चक्कर काटने के बाद जब हल नहीं निकला तो परिजन बच्चे को लेकर मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल पहुंचे. यहां शिशु रोग चिकित्सक डॉ. संजीव प्रजापति ने बड़े जतन से बच्चे के गले में फंसे सिक्के को निकालकर परिजनों को एक बड़ी राहत दी.
 
बच्चे आर्यन साकेत ने खेल-खेल में 5 रुपए का सिक्का निगल लिया था. जिसके चलते उसके गले में दर्द और भोजन निगलने में परेशानी बनी हुई थी. कर्वी और बांदा के डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए तो आनंद किशोर अपने रिश्तेदार की मदद ने बच्चे को सतना जिला अस्पताल लेकर पहुंचे. 

अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संजीव प्रजापति ने बच्चे का फुलबॉडी एक्स-रे कराया तो पता चला कि सिक्का बच्चे की आहार नली में फंसा है. उन्होंने अपने सीनियर और शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कारखुर से सलाह मशविरा किया और यह तय किया गया कि सिक्के को दूरबीन की मदद से नहीं बल्कि फोलीज कैथेटर (Foley's Catheter) की सहायता से निकाला जाएगा. डॉक्टर ने नर्सिंग स्टाफ सुनैना रजक, संगीता  पटेल और सपोर्टिंग स्टाफ की मदद से सिक्का निकाल दिया.

डॉ. प्रजापति ने बताया, 4 साल का बच्चा कर्वी- चित्रकूट से लाया गया था. तीन दिन पहले उसके गले में सिक्का फंसा था. जिससे दर्द और दर्द की समस्या बनी हुई थी. कई जगह दिखाने के बाद परिजन उसे जिला अस्पताल लाए थे. हमने एक्सरे और जरूरी जांचें कराईं. एक्सरे में पता चला कि सिक्का आहार नली में फंसा हुआ है. चूंकि आहार नली में फंसे सिक्के या कोई वस्तु निकालने के लिए इंडोस्कोपी की जरूरत होती है, जबकि छोटे स्तर पर हमारे यहां ऐसी व्यवस्था नहीं है. 

शिशु रोग विशेषज्ञ ने इसके विकल्प के तौर पर फोलीज कैथेटर के एक बैलूनिंग मैथड का इस्तेमाल किया. यह उन्होंने मेडिकल कॉलेज में सीनियर डॉक्टर्स से सीखा था, इसीलिए बड़ी सरलता से बच्चे के गले में फंसा सिक्का बाहर निकाल दिया. अब बच्चा बिल्कुल स्वस्थ है. 

 

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