मध्य प्रदेश के सिवनी स्थित पेंच टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में मिले युवक के सिर धड़ से अलग शव के मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद बड़ा खुलासा हुआ है. शुरुआत में इस घटना को लेकर बाघ के हमले या हत्या की आशंका पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब मेडिकल जांच ने तस्वीर साफ कर दी है.
दरअसल, 14 अप्रैल को छिंदवाड़ा जिले के गुमतरा रेंज में गश्ती दल को एक युवक का शव मिला था, जिसका सिर धड़ से अलग था. इस खौफनाक स्थिति ने वन विभाग के भीतर भी कई सवाल खड़े कर दिए थे कि क्या बाघ इस तरह हमला कर सकता है.
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वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा था कि बाघ आमतौर पर गर्दन पर हमला कर शिकार को अधमरा करता है, लेकिन इस मामले में सिर पूरी तरह धड़ से अलग मिला था, इसलिए फॉरेंसिक जांच की जरूरत बताई गई थी.
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खत्म की हत्या की आशंका
पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार शव की स्थिति को देखते हुए उच्च स्तर पर हत्या की संभावना पर भी चर्चा हुई थी. हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो गया कि युवक की मौत बाघ के हमले से ही हुई है.
पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल ने बताया कि युवक प्रतिबंधित कोर एरिया में गया था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चोटों और मौत की वजह जंगली जानवर, संभवतः बाघ का हमला बताई गई है.
उन्होंने कहा कि मौके पर पहुंचे फील्ड स्टाफ की जांच में भी यही निष्कर्ष सामने आया कि घटना बाघ के हमले की है.
डॉक्टर ने भी हत्या की आशंका खारिज की
इस मामले में पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर रजत लोधी ने भी हत्या की संभावना से इनकार किया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि युवक की मौत बाघ के हमले से हुई है.
फील्ड स्टाफ के अनुसार युवक का शव जलस्रोत के पास मिला था. संभावना जताई जा रही है कि बाघ पानी पीने आया और वहां बैठे युवक पर हमला कर दिया.
मंगलवार शाम गश्ती दल को नाहरझिर बीट में जलस्रोत के पास चट्टान पर खून के निशान मिले थे. तलाशी के दौरान करीब 150 मीटर दूर युवक का शव मिला, जिसका सिर धड़ से अलग था.
युवक की पहचान और मुआवजे पर फैसला
प्रबंधन द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार मृतक की पहचान 30 वर्षीय दिनेश सेवतकर के रूप में हुई है. बताया गया कि युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ था.
डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि नियमों के अनुसार कोर एरिया में हुई घटनाओं पर मुआवजा नहीं दिया जाता, लेकिन मानवीय आधार पर मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की गई है.
इस घटना ने एक बार फिर कोर एरिया में प्रवेश के खतरों और सुरक्षा नियमों के पालन की जरूरत को उजागर कर दिया है.