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लव-मैरिज करने पर नहीं मिलेगी परिवार के लोगों को दूध-सब्जी, MP के इस गांव का अजब-गजब फरमान

मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के पंचेवा गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें प्रेम विवाह करने वालों और उनके परिवार के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान किया गया. दूध, मजदूरी और सामाजिक कार्यक्रमों से दूर रखने की बात कही गई. ग्रामीणों की चुप्पी से सामूहिक सहमति का संकेत मिला. विवाद बढ़ने पर गांव वालों ने रुख बदला. पुलिस ने जांच और सख्त कार्रवाई की बात कही. मामला संविधान बनाम सामाजिक फरमान की बहस छेड़ता है.

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गांव में सुनाया गया अजीब फरमान. (Photo: ITG)
गांव में सुनाया गया अजीब फरमान. (Photo: ITG)

जब पूरा देश गणतंत्र दिवस की तैयारियों में जुटा था और संविधान के आदर्शों पर गर्व कर रहा था, उसी दौरान मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के एक गांव से सामने आया वीडियो समाज को आईना दिखाने वाला बन गया. यह वीडियो आज़ादी, समानता और व्यक्तिगत पसंद जैसे बुनियादी अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

परिवारों को नहीं मिलेगा दूध
रतलाम जिले के ग्राम पंचेवा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है. वीडियो सामने आते ही इलाके में हलचल मच गई और नागरिक अधिकारों को लेकर नई बहस छिड़ गई. वायरल क्लिप में एक युवक खुले तौर पर यह घोषणा करता दिखता है कि यदि गांव का कोई लड़का या लड़की परिवार या समाज की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह करता है, तो सिर्फ वही नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार सामाजिक बहिष्कार का सामना करेगा. वीडियो में यह भी कहा गया कि ऐसे परिवारों को दूध-सब्जी नहीं दिया जाएगा, किसी सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम में शामिल नहीं किया जाएगा, न ही उन्हें मजदूरी मिलेगी और गांव के लोग उनसे हर तरह का रिश्ता तोड़ लेंगे.

ग्रामीणों ने साधी चुप्पी
घोषणा के दौरान मंच पर बैठे अन्य ग्रामीणों की चुप्पी यह संकेत देती है कि यह किसी एक व्यक्ति की राय नहीं, बल्कि सामूहिक सहमति से लिया गया फैसला हो सकता है. यही बात इस पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना देती है.

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छह लड़कियां कर चुकी हैं प्रेम विवाह
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले छह महीनों में गांव की छह लड़कियां घर छोड़कर प्रेम विवाह कर चुकी हैं, जिससे गांव का माहौल बिगड़ा है. इसी आशंका के चलते कुछ परिवारों ने अपनी बेटियों की पढ़ाई तक रुकवा दी है. ग्रामीण यह दावा करते हैं कि वे प्रेम विवाह के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि शादी माता-पिता की सहमति से होनी चाहिए.

माता-पिता के खिलाफ देती हैं बयान
ग्रामीणों के अनुसार, जब प्रेम विवाह करने वाली लड़कियां लौटती हैं तो वे माता-पिता के खिलाफ बयान देती हैं, जिससे परिवार को मानसिक तनाव झेलना पड़ता है. इसी वजह से कुछ लोगों ने सामाजिक बहिष्कार जैसा कठोर कदम उठाने का समर्थन किया.

वीडियो वायरल होने के बाद बदला रुख
वीडियो के व्यापक प्रसार और बढ़ते विवाद के बाद अब गांव वालों के सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि बहिष्कार सिर्फ लड़का-लड़की तक सीमित रहेगा, माता-पिता को इससे बाहर रखा जाएगा. वहीं, एक लड़की के पिता ने भी दावा किया कि गांव में उनके खिलाफ कोई पाबंदी नहीं है और लोग उनका सहयोग कर रहे हैं.

पुलिस ने क्या कहा?
मामले पर रतलाम के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने कहा कि उन्हें वीडियो की जानकारी मिली है और इसकी जांच की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या समुदाय कानून से ऊपर नहीं हो सकता. यदि किसी ने कानून अपने हाथ में लिया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.

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संविधान बनाम सामाजिक फरमान
भारतीय संविधान हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है. सुप्रीम कोर्ट भी कई बार दो टूक कह चुका है कि दो बालिगों को अपनी पसंद से शादी करने का पूरा हक है. ऐसे में पंचेवा गांव का यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या सामाजिक आदेश संविधान से ऊपर हो सकते हैं?

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