
नीमच की कनावटी पुलिस लाइन में हेड कॉन्स्टेबल होशियार सिंह ने आला अधिकारियों पर प्रताड़ना और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली. मौत से पहले लिखे 3 पन्नों के सुसाइड नोट में उन्होंने रक्षित निरीक्षक (RI) विक्रम सिंह भदौरिया और हेड कॉन्स्टेबल प्रणव तिवारी पर सीधा निशाना साधते हुए खुलासा किया कि पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने और रोजनामा लिखने के नाम पर 5 से 10 हजार रुपये की अवैध वसूली की जा रही है.
50 वर्षीय होशियार सिंह ने नोट में अपना दर्द व्यक्त करते हुए लिखा कि विभाग में ईमानदार आदमी का नौकरी करना मुश्किल हो गया है और भ्रष्टाचार का विरोध करने पर बड़े अधिकारियों के नाम का डर दिखाकर प्रताड़ित किया जाता है.
सुसाइड नोट में होशियार सिंह ने निरीक्षक (RI) और हेड कॉन्स्टेबल पर सीधे आरोप लगाए और डीजीपी को लिखा, ''मेरा आवेदन वायरल होने ओर पुलिस विभाग मुझे मार सकता है. एसपी साहब के ससुर का टिकट 10 हजार रुपए में आरआई साहब बनवाते हैं. एसपी साहब यहां खेलने आते हैं तो रोजाना खर्चा आरआई साहब और अन्य उठाते हैं. नीमच में सब कुछ बिक रहा है. जो लाइन में पैसे देगा, उसके प्रति सहानुभूति रहेगी. मुझे आत्महत्या करने की स्वीकृति प्रदान करें...''

दरअसल, रविवार दोपहर जहर खाने के बाद होशियार सिंह खुद चलकर कंट्रोल रूम पहुंचे थे, जहां से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. इस घटना और सोशल मीडिया पर वायरल हुए सुसाइड नोट ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इधर, आरोप के जवाब पर नीमच एसपी अंकित जायसवाल ने कहा कि मृत होशियार सिंह ने नशे की हालत में जहर पिया होगा. उन्होंने होशियार सिंह के कार्यकाल की कमियां बताते हुए प्रश्न चिन्ह लगा दिया. साथ ही कहा कि सुसाइड नोट के हैंड राइटिंग की जांच करवाएंगे. साथ ही एसपी ने कहा कि होशियार पहले भी कई बार अनियमित के चलते सवालों में रहे. हालांकि, एसपी ने हेड कॉन्स्टेबल की मौत पर संवेदना कहते हुए जांच की बात कही.
होशियार सिंह के शव को पोस्टमार्टम के बाद हरियाणा स्थित पैतृक गांव में परिवार के साथ अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया गया है. लेकिन अगर मृतक होशियार सिंह की बेटी ने रोते-रोते पिता की व्यथा बताई.
मृत हेड कॉन्स्टेबल की बेटी अर्पिता ने कहा, ''पिताजी का ऑपरेशन हुआ था और वह लगातार परेशान चल रहे थे और जानबूझकर उनकी ड्यूटी लगाई जाती थी. पिताजी ड्यूटी को कम करने की बोलते, लेकिन उन्हें प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता था.''