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KBC में जीते थे 50 लाख, अब जेल की तैयारी? लेडी अफसर अमिता सिंह तोमर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, गिरफ्तारी तय!

केबीसी (KBC) में 50 लाख रुपये जीतकर रातो-रात सुर्खियों में आईं महिला तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं. श्योपुर के बहुचर्चित 'बाढ़ राहत घोटाले' में सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.

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श्योपुर के घोटाले में फंसीं तहसीलदार अमिता तोमर.(File Photo)
श्योपुर के घोटाले में फंसीं तहसीलदार अमिता तोमर.(File Photo)

मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले की विजयपुर तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. बाढ़ राहत राशि घोटाले के मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दी है. इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.

दरअसल, साल 2021 में श्योपुर जिले में आई बाढ़ के बाद पीड़ितों के लिए राहत राशि का वितरण किया गया था. आरोप है कि बड़ौदा तहसील में उस समय पदस्थ तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर, करीब 25 पटवारियों और 100 से ज्यादा दलालों ने मिलकर 127 फर्जी खातों में लगभग 2.57 करोड़ रुपये की राशि बांट दी. यह गड़बड़ी डिप्टी कलेक्टर की ऑडिट में पकड़ में आई, जिसके बाद बड़ौदा थाने में FIR दर्ज कराई गई.

2.57 करोड़ का बाढ़ राहत घोटाला 

जांच में आरोप लगा कि राहत राशि वितरण के दौरान रिश्तेदारों और परिचितों को बाढ़ पीड़ित दिखाकर रकम उनके खातों में डलवाई गई. इस कथित घोटाले में तहलसील कार्यालय के कर्मियों और बिचौलियों की मिलीभगत बताई गई है. पुलिस जांच में 100 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें अमिता सिंह तोमर और 25 पटवारी भी शामिल हैं.

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अब आगे क्या?

गिरफ्तारी से बचने के लिए अमिता सिंह तोमर ने पहले हाई कोर्ट (ग्वालियर खंडपीठ) में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.

इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में SLP के साथ अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई. 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी,अब या तो उन्हें स्वेच्छा से सरेंडर करना होगा या पुलिस गिरफ्तारी कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद राजस्व अमले और प्रशासनिक तंत्र में हलचल तेज हो गई है. बड़ौदा थाने की पुलिस कभी भी अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी कर सकती है.

कानूनी जानकारों के मुताबिक,अब उनके पास सरेंडर या कस्टोडियल इंटरोगेशन की स्थिति के लिए तैयार रहने के विकल्प हैं.

KBC से लेकर विवादित पोस्ट तक का सफर

बता दें कि महिला तहसीलदार अमिता सिंह तोमर साल 2011 में केबीसी के पांचवें सीजन में 50 लाख रुपये जीतकर सुर्खियों में आई थीं. पिछले वर्षों में सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट और कमेंट डालकर प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताने और संविधान से जुड़ी एक पोस्ट पर आपत्तिजनक कमेंट करने पर अमिता तोमर निलंबित भी हो चुकी हैं. 

इतना ही नहीं, अमिता सिंह अपने बार-बार तबादलों लेकर पीएम मोदी को पत्र भी लिख चुकी हैं. साल 2023 में तहसील का प्रभार नहीं मिलने से खफा होकर इस्तीफे के पत्र भी लिख चुकी हैं.

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