सरकारी अस्पताल में दी जाने वाली दवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं. मध्य प्रदेश के जबलपुर में बच्चों को दिए जाने वाले पैरासिटामोल सिरप (Paracetamol Syrup) के सैंपल भोपाल की लैब में हुई जांच में फेल हो गए हैं. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सिरप के एक बैच पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.
दरअसल, जबलपुर जिले में सरकारी अस्पतालों में बैच नंबर 41507 नंबर की पैरासिटामोल दवा की सप्लाई की गई थी. पैरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आईपी (125 mg) की निर्माता कंपनी इंदौर की मेसर्स जेनिथ ड्रग्स लिमिटेड है, जिसने 1 साल पहले जबलपुर के जिला अस्पताल में सिरप सप्लाई किया था.
जबलपुर मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ नवीन कोठारी का कहना है, वैसे तो पूरी गाइडलाइन और जांच के बाद ही सरकारी अस्पतालों में दवा की सप्लाई होती है, लेकिन एहतियात के तौर पर सप्लाई होने के बाद एक बार फिर दवा का सैंपल जांच के लिए भेजा जाता है.
इसी प्रक्रिया के तहत पेरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आईपी का सैंपल भोपाल की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया था जिसकी रिपोर्ट आने में 1 साल का वक्त लग गया.
1 साल बाद जब रिपोर्ट आई तो रिपोर्ट में पैरासिटामोल जांच में फेल हो गई, इसलिए सुरक्षा के तहत सभी अस्पतालों, उप स्वास्थ्य केंद्रों और संजीवनी क्लीनिक में पैरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आईबी के वितरण पर रोक लगा दी है. साथ ही पैरासिटामोल सिरप के स्टॉक की जांच के लिए भी निर्देश जारी कर दिए हैं.
जानकारी के मुताबिक, पैरासिटामोल सिरप नवंबर 2024 में बनाया गया था जिसकी एक्सपायरी डेट अक्टूबर 2026 हैं. पैरासिटामोल सिरप के जांच में फेल होने का यह पहला मामला नहीं है.
मध्य प्रदेश में इसके सैंपल फेल हुए हैं. इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इस सिरप के साथ ही अन्य सिरप और अन्य दवाओं के सैंपल क्वालिटी जांच में फेल पाए जा चुके हैं. बार-बार सामने आने वाले इन मामलों से यह संकेत मिलता है कि दवा सप्लाई और क्वालिटी कंट्रोल की प्रक्रिया में कहीं न कहीं कोई चूक जरूर हो रही है.