मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का सबसे लोकप्रिय खान-पान बाजार '56 दुकान' अब एक बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है. मिडिल ईस्ट के देशों में चल रहे तनाव के कारण कमर्शियल गैस सिलेंडरों की लगातार बढ़ती किल्लत ने यहां के व्यापारियों को नई तकनीक अपनाने पर मजबूर कर दिया है.
56 दुकान व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष गुंजन शर्मा ने इस मुहिम की शुरुआत अपने प्रतिष्ठान से कर दी है. उन्होंने पारंपरिक गैस भट्टी को हटाकर इलेक्ट्रिक इंडक्शन पर खाना बनाना शुरू किया है. उनके इस कदम को देखते हुए बाजार के अन्य व्यापारियों ने भी इंडक्शन ऑर्डर कर दिए हैं.
व्यापारियों की योजना पूरे 56 दुकान बाजार को सोलर पैनल के जरिए बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की है, ताकि इंडक्शन चलाने के लिए निर्बाध और सस्ती बिजली मिल सके.
मेन्यू में कटौती का डर
गुंजन शर्मा ने बताया कि यदि परेशानी बढ़ती है, तो मजबूरी में कुछ ऐसे व्यंजन बंद करने पड़ सकते हैं जिनके लिए गैस भट्टी अनिवार्य है.
छोटे दुकानदारों के सामने संकट
एक तरफ जहां 56 दुकान जैसे बड़े बाजार इंडक्शन पर शिफ्ट हो रहे हैं, वहीं छोटे ढाबे और कैंटीन संचालक बंदी की कगार पर हैं. कमर्शियल सिलेंडर की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में देरी ने छोटे वेंडर्स को फिर से पुराने कोयले और लकड़ी की भट्टी की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया है, जिससे शहर की एअर क्वालिटी पर असर पड़ सकता है.
प्रशासन की सलाह और घरेलू गैस की हालत
प्रशासन ने साफ किया है कि इंदौर में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है. कालाबाजारी रोकने के लिए OTP आधारित डिलीवरी और 25 दिन का गैप अनिवार्य किया गया है. होटल और कैटरिंग व्यवसायियों को अस्थायी संकट से निपटने के लिए इंडक्शन, इन्फ्रारेड, डीजल या बायोफ्यूल जैसे वैकल्पिक स्रोतों को अपनाने की सलाह दी गई है.
इनका कहना
56 दुकान व्यापारी एसोसिएशन अध्यक्ष गुंजन शर्मा ने कहा, "कमर्शियल सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहे और दाम आसमान छू रहे हैं. ऐसे में इलेक्ट्रिक इंडक्शन ही भविष्य का रास्ता है."