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50 IAS-IPS अफसरों ने पहले खरीदी जमीन, फिर वहीं से निकला बाईपास... ₹5 करोड़ की प्रॉपर्टी हुई 60 करोड़ की, CM से शिकायत

भोपाल वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट के रूट पर 50 IAS-IPS अफसरों के प्रोजेक्ट से पहले जमीनें खरीदने के आरोप. 'सिस्टम परिवर्तन अभियान' ने सीएम मोहन यादव से 3200 करोड़ रुपये की योजना रद्द करने की मांग की...

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तीन बार बदला गया भोपाल के वेस्टर्न बाईपास का रास्ता. (Photo: Representational image)
तीन बार बदला गया भोपाल के वेस्टर्न बाईपास का रास्ता. (Photo: Representational image)

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रस्तावित 35 किमी लंबे और 3200 करोड़ रुपये की लागत वाले वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. राज्य के एक भ्रष्टाचार विरोधी संगठन 'सिस्टम परिवर्तन अभियान' (SPA) ने आरोप लगाया है कि देश के 50 सीनियर IAS और IPS अफसरों ने अपनी प्रशासनिक पहुंच का फायदा उठाकर इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने से महीनों पहले ही तय रूट पर करोड़ों की जमीनें खरीद ली थीं. संगठन ने इस पूरे प्रोजेक्ट को रद्द करने और जमीनी सौदों की उच्च-स्तरीय जांच कराने की मांग की है. क्या है मुख्य आरोप? प्रोजेक्ट से 16 महीने पहले की रजिस्ट्री...

SPA के अध्यक्ष और भारतीय वन सेवा (IFS) के रिटायर्ड अधिकारी आजाद सिंह डबास ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कई सनसनीखेज खुलासे किए.

मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए दावा किया गया कि अलग-अलग राज्यों के करीब 50 IAS और IPS अफसरों ने 4 अप्रैल 2022 को एक ही रजिस्ट्री दस्तावेज के जरिए भोपाल के कोलार इलाके के गुराड़ी घाट गांव में 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी थी. यह जमीन 5.5 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी, जबकि उस समय इसकी बाजार कीमत 7.78 करोड़ रुपये थी.

मंजूरी से पहले की सेटिंग
अफसरों के जमीन खरीदने के करीब 16 महीने बाद यानी 31 अगस्त 2023 को इस 35 किमी लंबे वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट को आधिकारिक मंजूरी मिली.

लैंड यूज में बदलाव
डबास ने आरोप लगाया कि इसके बाद जून 2024 में इस जमीन का डायवर्जन (कृषि से आवासीय) भी नियमों को ताक पर रखकर करा दिया गया.

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5.5 करोड़ की जमीन अब 60 करोड़ की 
संगठन के अनुसार, अफसरों की इस 'दूरदर्शिता' के चलते साल 2022 में जो जमीन 5.5 करोड़ रुपये की थी, उसकी कीमत आज आसमान छूते हुए 55 से 60 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है.

SPA अध्यक्ष आजाद सिंह डबास ने कहा, "ऐसा लगता है कि इस सड़क प्रोजेक्ट का निर्माण जनता की सहूलियत के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ IAS और IPS अफसरों को आर्थिक फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, जिसकी कोई वास्तविक जरूरत ही नहीं है.'' 

3 बार बदला गया अलाइनमेंट 
शिकायत पत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव को बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट का अलाइनमेंट तीन बार बदला गया. हैरानी की बात यह है कि हर बार रास्ता इस तरह घुमाया गया कि वह अधिकारियों द्वारा खरीदी गई जमीन के बिल्कुल पास से गुजरे. डबास ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2013 से 2016 बैच के कई अधिकारियों ने अपनी पत्नियों और बच्चों के नाम पर बेनामी संपत्तियां खरीदी हैं और नियमों का उल्लंघन कर निर्माण कार्य कराए हैं.

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